असम : कपड़ा दुकानदार के पांच बेटे बने देश के प्रहरी

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 22-06-2026
Assam: Textile shopkeeper's five sons become guardians of the nation.
Assam: Textile shopkeeper's five sons become guardians of the nation.

 

सतनंद भट्टाचार्य

असम के श्रीभूमि जिले के एक छोटे से गांव की कहानी इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। यह कहानी किसी बड़े अधिकारी, उद्योगपति या राजनीतिक परिवार की नहीं है। यह कहानी एक साधारण कपड़ा दुकानदार और उसके देशभक्ति से भरे परिवार की है, जिसने पूरे इलाके के लिए प्रेरणा की मिसाल पेश की है।

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श्रीभूमि जिले के रामकृष्ण नगर के निकट स्थित ढालीबिल गांव के निवासी तासिर अली आज अपने बच्चों की उपलब्धियों पर गर्व महसूस करते हैं। उनकी सात संतानें हैं। इनमें से चार बेटे भारतीय सेना में देश की सेवा कर रहे हैं, जबकि एक बेटा असम पुलिस में तैनात है। एक ही परिवार के पांच सदस्यों का सुरक्षा बलों में सेवा देना इलाके में बेहद दुर्लभ माना जा रहा है।

तासिर अली का जीवन बेहद साधारण रहा है। वह रामकृष्ण नगर बाजार में एक छोटी कपड़ों की दुकान चलाकर परिवार का पालन पोषण करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों को ईमानदारी, अनुशासन और देशसेवा की भावना सिखाई। यही संस्कार आज उनके परिवार की सबसे बड़ी पहचान बन चुके हैं।

भारतीय सेना में तैनात उनके चार बेटों में से दो इस समय कश्मीर घाटी में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यह क्षेत्र देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। उनका एक बेटा पंजाब में तैनात है, जबकि चौथा बेटा असम के उत्तर लखीमपुर में सेवा दे रहा है। वहीं असम पुलिस में कार्यरत उनका बेटा पड़ोसी जिले हैलाकांडी में अपनी ड्यूटी निभा रहा है।

परिवार का एक बेटा अभी पढ़ाई कर रहा है। उनकी एकमात्र बेटी का विवाह हो चुका है। दुख की बात यह है कि बच्चों की मां अब इस दुनिया में नहीं हैं। वह अपने बेटों की इस उपलब्धि को देखने के लिए जीवित नहीं रहीं। फिर भी उनके दिए संस्कार आज परिवार की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आए हैं।

तासिर अली जब अपने बेटों की बात करते हैं तो उनकी आंखें नम हो जाती हैं। वह कहते हैं कि उनके बच्चों ने साधारण स्कूलों में पढ़ाई की। उन्हें किसी महंगे कोचिंग संस्थान या विशेष प्रशिक्षण का अवसर नहीं मिला। फिर भी उन्होंने मेहनत, लगन और अनुशासन के बल पर भारतीय सेना और असम पुलिस जैसी प्रतिष्ठित सेवाओं में जगह बनाई।

तासिर अली का कहना है कि उन्हें हमेशा विश्वास था कि उनके बच्चे बड़े होकर कुछ अच्छा करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके बेटों की कहानी देश के युवाओं को सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों में शामिल होकर राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करेगी।

ढालीबिल गांव के लोगों के लिए यह परिवार गर्व का विषय बन चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि एक ही परिवार के इतने सदस्यों का सेना और पुलिस में होना पूरे क्षेत्र के लिए सम्मान की बात है। उनका मानना है कि यह उदाहरण युवाओं को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने और देश के लिए योगदान देने की प्रेरणा देगा।

सोशल मीडिया पर भी इस परिवार की कहानी तेजी से फैल रही है। हजारों लोग तासिर अली और उनके बेटों की सराहना कर रहे हैं। लोग इसे देशभक्ति, त्याग और समर्पण का अनूठा उदाहरण बता रहे हैं। कई लोगों ने तासिर अली की परवरिश और उनके संस्कारों की भी खुलकर प्रशंसा की है।

आज तासिर अली का परिवार केवल श्रीभूमि जिले तक सीमित नहीं रहा। यह पूरे असम और देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है। यह कहानी बताती है कि सफलता केवल धन और सुविधाओं से नहीं मिलती। मजबूत इरादे, कड़ी मेहनत और देश के प्रति समर्पण भी किसी परिवार को असाधारण बना सकते हैं।

ऐसे समय में जब युवा आदर्श व्यक्तित्वों की तलाश करते हैं, तब असम के इस साधारण परिवार की कहानी एक बड़ा संदेश देती है। अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मन में देशसेवा की भावना हो तो साधारण घरों से भी असाधारण उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

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त्वरित तथ्य

प्रश्न: तासिर अली कौन हैं?

उत्तर: असम के श्रीभूमि जिले के एक कपड़ा दुकानदार, जिनके चार बेटे सेना और एक बेटा असम पुलिस में हैं।

प्रश्न: कितने बेटे भारतीय सेना में हैं?

उत्तर: चार बेटे भारतीय सेना में सेवा दे रहे हैं।

प्रश्न: असम पुलिस में कौन कार्यरत है?

उत्तर: तासिर अली का एक बेटा असम पुलिस में तैनात है।

प्रश्न: यह परिवार चर्चा में क्यों है?

उत्तर: एक ही परिवार के पांच सदस्य देश की सुरक्षा सेवाओं में कार्यरत हैं।

प्रश्न: युवाओं के लिए क्या संदेश है?

उत्तर: मेहनत, अनुशासन और देशभक्ति के बल पर बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।