80 years after its inception, the Security Council is still struggling to maintain peace: India
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारत ने दुनिया के कुछ ‘‘सबसे गंभीर’’ संघर्षों में शांति और सुलह कायम करने में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के जूझने का जिक्र करते हुए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध में मिली जीत के आधार पर हासिल अधिकार आज की ऐसी सुरक्षा परिषद की वैधता की कमी की भरपाई नहीं कर सकते, जिसमें दुनिया के सभी देशों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने बृहस्पतिवार को कहा कि जो संगठन अपने प्रमुख अंग में बदलाव नहीं कर सकता, उसके लिए 1945 के बाद से काफी आगे बढ़ चुकी दुनिया में अपना प्राधिकार कायम रखना लगातार मुश्किल होता जाएगा।
पर्वतनेनी ने यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘सुरक्षा परिषद में समान प्रतिनिधित्व और उसकी सदस्य संख्या बढ़ाने का सवाल’ विषय पर चर्चा के दौरान कहा, ‘‘इसकी कीमत पहले ही दिखाई दे रही है। 80 साल बाद भी यह संगठन परिषद के सामने मौजूद कुछ सबसे गंभीर संघर्षों में शांति और सुलह कायम करने में जूझ रहा है।’’
भारतीय राजदूत ने कहा, ‘‘आठ दशक पहले मिली जीत से हासिल अधिकार आज की ऐसी सुरक्षा परिषद की वैधता की कमी की भरपाई नहीं कर सकता, जिसमें सभी का उचित प्रतिनिधित्व नहीं है।’’
पर्वतनेनी ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित वैश्विक संगठन की कमियों और मौजूदा भू-राजनीतिक चुनौतियों तथा संघर्षों से निपटने में उसकी नाकामियों को रेखांकित किया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने बृहस्पतिवार को कहा कि जो संगठन अपने प्रमुख अंग में बदलाव नहीं कर सकता, उसके लिए 1945 के बाद से काफी आगे बढ़ चुकी दुनिया में अपना प्राधिकार कायम रखना लगातार मुश्किल होता जाएगा।
पर्वतनेनी ने यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘सुरक्षा परिषद में समान प्रतिनिधित्व और उसकी सदस्य संख्या बढ़ाने का सवाल’ विषय पर चर्चा के दौरान कहा, ‘‘इसकी कीमत पहले ही दिखाई दे रही है। 80 साल बाद भी यह संगठन परिषद के सामने मौजूद कुछ सबसे गंभीर संघर्षों में शांति और सुलह कायम करने में जूझ रहा है।’’
भारतीय राजदूत ने कहा, ‘‘आठ दशक पहले मिली जीत से हासिल अधिकार आज की ऐसी सुरक्षा परिषद की वैधता की कमी की भरपाई नहीं कर सकता, जिसमें सभी का उचित प्रतिनिधित्व नहीं है।’’
पर्वतनेनी ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित वैश्विक संगठन की कमियों और मौजूदा भू-राजनीतिक चुनौतियों तथा संघर्षों से निपटने में उसकी नाकामियों को रेखांकित किया।