चोट के निशान न होने पर पॉक्सो पीड़िता को मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 23-10-2026
POCSO victim cannot be denied compensation for lack of injury marks: Allahabad High Court
POCSO victim cannot be denied compensation for lack of injury marks: Allahabad High Court

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि यौन उत्पीड़न की शिकार पीड़िता को पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के तहत केवल इस आधार पर मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता कि चिकित्सीय रिपोर्ट में शारीरिक चोटों का उल्लेख नहीं है।
 
न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने अधिकारियों को उत्तर प्रदेश रानी लक्ष्मी बाई महिला सम्मान कोष योजना के तहत एक नाबालिग पीड़िता को आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने के 10 दिनों के भीतर तीन लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया।
 
अदालत ने कहा कि जिला समन्वय समिति का मुआवजा रोकने का निर्णय कानून और योजना के प्रावधानों के विपरीत था।
 
यह मामला सात दिसंबर, 2022 को लखनऊ के सरोजिनी नगर थाने में दर्ज एक प्राथमिकी से संबंधित है। 13 जनवरी, 2023 को आरोपपत्र दाखिल किया गया था।
 
योजना के तहत, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के अंतर्गत यौन उत्पीड़न की पीड़िताओं को तीन लाख रुपये के मुआवजे का अधिकार है। इसमें से एक लाख रुपये प्राथमिकी दर्ज होने के 15 दिनों के भीतर दिए जाने चाहिए, जबकि बाकी दो लाख रुपये आरोप पत्र दाखिल होने के एक महीने के भीतर दिए जाने चाहिए।