विश्व एथलेटिक्स ने भारत को डोपिंग के मामले में बेहद जोखिम वाली श्रेणी में शामिल कर दिया है। मोनाको में सोमवार को जारी इस फैसले के बाद भारतीय एथलेटिक्स पर सख्त निगरानी और कड़े डोपिंग रोधी नियम लागू किए जाएंगे।
पिछले दो वर्षों में डोपिंग मामलों में लगातार बढ़ोतरी के चलते भारत को यह दर्जा दिया गया है। एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट यानी एआईयू ने भारतीय एथलेटिक्स महासंघ को एक बार फिर श्रेणी बी से हटाकर श्रेणी ए में डाल दिया है। यह बदलाव विश्व एथलेटिक्स के डोपिंग रोधी नियमों के नियम 15 के तहत किया गया है।
एआईयू के अध्यक्ष डेविड हॉमन ने इस निर्णय पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत में डोपिंग की समस्या लंबे समय से गंभीर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर डोपिंग रोधी व्यवस्था उस स्तर की नहीं है, जिसकी इस खतरे से निपटने के लिए आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने सुधार की दिशा में प्रयास जरूर किए हैं, लेकिन वे पर्याप्त नहीं रहे हैं। इसी कारण भारत को फिर से उच्च जोखिम वाले देशों की सूची में शामिल किया गया है।
एआईयू ने स्पष्ट किया है कि अब वह भारतीय एथलेटिक्स महासंघ के साथ मिलकर काम करेगा। इसका उद्देश्य डोपिंग नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करना और खेल की अखंडता को बनाए रखना है। यह वही प्रक्रिया है जो अन्य श्रेणी ए देशों के साथ भी अपनाई जाती है।
इस फैसले का सीधा असर भारतीय एथलीटों पर पड़ेगा। अब उन्हें अधिक सख्त परीक्षण, निगरानी और अनुपालन प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी के दौरान भी अतिरिक्त जांच की संभावना बढ़ जाएगी।
रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2022 से 2025 के बीच भारत में एथलेटिक्स से जुड़े डोपिंग उल्लंघनों में बढ़ोतरी देखी गई है। इसी अवधि में कई एथलीट प्रतिबंधित पदार्थों के उपयोग के मामलों में पकड़े गए हैं।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति भारतीय एथलेटिक्स के लिए चिंता का विषय है। इससे देश की छवि पर भी असर पड़ सकता है, खासकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जहां पारदर्शिता और निष्पक्षता को बहुत महत्व दिया जाता है।
हालांकि एआईयू ने यह भी संकेत दिया है कि सुधार की गुंजाइश अब भी मौजूद है। यदि मजबूत निगरानी व्यवस्था, शिक्षा कार्यक्रम और सख्त कार्रवाई लागू की जाए तो स्थिति में सुधार संभव है।
भारतीय खेल प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती डोपिंग नियंत्रण प्रणाली को प्रभावी बनाना है। इसके लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता होगी।
यह फैसला भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। इससे साफ है कि वैश्विक खेल मंच पर प्रदर्शन के साथ-साथ अनुशासन और नियमों का पालन भी उतना ही जरूरी है।