कृषि कानून वापसी विधेयक संसद से पारित, विधेयक अब राष्ट्रपति के पास

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] • 1 Years ago
क्या किसान आंदोलन खत्म हो जाएगा ?

आवाज द वाॅयस/ नई दिल्ली

अपडेट 3.25 बजे

राज्यसभा में भारी नारेबाजी के बीच सोमवार को कृषि कानून निरसन विधेयक 2021 को पारित कर दिया गया. इससे पहले विधेयक को लोकसभा में पारित किया गया था. दोपहर 2 बजे जब राज्यसभा की बैठक हुई तो केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्यसभा में प्रस्ताव पेश किया.

इससे पहले लोकसभा में विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के बीच विधेयक को पारित कर दिया गया. लोकसभा अध्यक्ष ने विधेयक को ध्वनि मत के लिए रखा था और इसे कुछ ही सेकंड में मंजूरी दे दी गई, जबकि विपक्ष ने इस तथ्य का विरोध करते हुए अपनी नारेबाजी जारी रखी कि इसे लेकर कोई चर्चा नहीं हुई थी.

कृषि कानून वापसी विधेयक 2021 लोकसभा से पारित कर दिया है. संसद ने शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लेने का विधेयक पारित कर दिया है. गौतरलब है कि किसान संगठन तीन कृषि कानूनों के खिलाफ करीब एक साल से दिल्ली सीमा पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

इससे पहले संसदीय सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भविष्य में संसद कैसे चलाई जाए, कितना अच्छा सहयोग किया गया, कितना सकारात्मक काम किया गया, इस पैमाने पर तौलना चाहिए. यह इस बात का पैमाना नहीं होना चाहिए कि सत्र को किसने आगे बढ़ाया. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हर मुद्दे पर खुली चर्चा के लिए तैयार है. हम यह भी चाहते हैं कि संसद और शांति में प्रश्न हों.

क्या किसान आंदोलन होगा खत्म? किसान संघ आज ले सकते हैं फैसला 

पिछले एक साल से चल रहा किसान आंदोलन कब खत्म होगा, इस पर फैसला लेने के लिए आज किसान संघों की अहम बैठक हो रही है. 

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की थी. इसके मद्देनजर पंजाब के सभी 32 किसान संगठनों ने मौजूदा हालात पर चर्चा के लिए बैठक बुलाई है. बैठक सांघू बार्डर पर होगी. किसान अब घर लौटेंगे, बैठक में यह फैसला हो सकता है.

पंजाब के किसान संगठनों की बैठक काफी अहम मानी जा रही है. खासकर तब जब संयुक्त किसान मोर्चा ने कृषि आंदोलन को लेकर कहा है कि वह आगे की कार्रवाई पर फैसला करने के लिए 4 दिसंबर को बैठक करेगा.

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अंग्रेजी अखबार द ट्रिब्यून के अनुसार, तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए संसद द्वारा एक विधेयक पारित किए जाने के बाद कुछ संगठन स्वदेश लौटने के पक्ष में हैं. वहीं एमएसपी गारंटी की मांग पर विचार करने के लिए कृषि संगठनों के प्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों की संयुक्त समिति का गठन किया गया है.

घर लौटना चाहते हैं किसान

एक किसान नेता ने कहा, ‘‘पंजाब संगठन 4 दिसंबर को प्रस्तावित एसकेएम बैठक से पहले ‘आगे बढ़ने‘ या ‘घर जाने‘ की भविष्य की रणनीति पर आम सहमति पर पहुंचना चाहता है.‘‘ बीकेयू (डकोंडा) के बोटक सिंह ने कहा, “पंजाब संगठन चर्चा करेंगे कि उन्हें कब घर लौटना है.

अगर कृषि कानूनों को निरस्त किया जाता है. किसानों की एक संयुक्त समिति बनाई जाती है, तो आंदोलन को लेकर कुछ भी निर्णय लिया जा सकता है. ऐसा नहीं करने पर एसकेएम आगे की कार्रवाई करेगा. बीकेयू (राजेवाल) के परगट सिंह ने कहा कि बैठक निर्णायक होगी, लेकिन अंतिम फैसला 4दिसंबर को एसकेएम द्वारा लिया जाएगा.

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आम सहमति से होगा फैसला

एसकेएम नेता इंद्रजीत सिंह ने कहा कि एसकेएम की बैठक से पहले पंजाब और हरियाणा दोनों अलग-अलग बैठकें करते रहे हैं. हालांकि, अंतिम निर्णय एसकेएम के माध्यम से सर्वसम्मति से लिया गया है. उन्होंने कहा कि एसकेएम की बैठक से पहले 4दिसंबर की सुबह हरियाणा संगठन की बैठक भी होगी.

अब क्या है किसानों की मांग ?

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद कैबिनेट ने तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मंजूरी दे दी है, लेकिन किसान अभी भी दिल्ली की सीमाओं से डटे हुए हैं. किसान एमएसपी गारंटी चाहते हैं. साथ ही आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों को मुआवजा ने की मांग कर रहे हैं.

उनकी स्मृति में एक मूर्ति भी बनाने की मांग उठाई जा रही है. अन्य मांगों में है- जिन किसानों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, उन्हें वापस लिया जाए. किसान अभी भी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं.

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किसान आंदोलनः जाने कब क्या हुआ


5 जून, 2020ः सरकार ने तीन अध्यादेश जारी किए.

14 सितंबर, 2020ः तीन कृषि विधेयक संसद में लाए गए.

17 सितंबर, 2020ः लोकसभा में बिल पास हुए.

20 सितंबर, 2020ः राज्यसभा में विधेयकों को ध्वनिमत से पारित किया गया.

24 सितंबर, 2020ः पंजाब में किसानों ने तीन दिवसीय रेल नाकेबंदी की घोषणा की.

25 सितंबर, 2020ः अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान के जवाब में पूरे भारत के किसान विरोध में उतरे.

26 सितंबर, 2020ः शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने कृषि बिलों को लेकर भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से इस्तीफा दे दिया.

27 सितंबर, 2020ः कृषि बिलों को राष्ट्रपति की सहमति दी जाती है और भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया जाता है और कृषि कानून बन जाते हैं.

25 नवंबर, 2020ः पंजाब और हरियाणा में किसान संघों ने ‘दिल्ली चलो‘ आंदोलन का आह्वान कियाय कोविड प्रोटोकॉल के कारण दिल्ली पुलिस ने अनुमति से इनकार कर दिया.

26 नवंबर, 2020ः दिल्ली की ओर मार्च कर रहे किसानों को पानी की बौछारों, आंसू गैस का सामना करना पड़ा क्योंकि पुलिस ने उन्हें हरियाणा के अंबाला जिले में तितर-बितर करने की कोशिश की.

28 नवंबर, 2020ः केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किसानों के साथ बातचीत करने की पेशकश की ताकि वे दिल्ली की सीमाओं को खाली कर दें.

3 दिसंबर, 2020ः सरकार ने किसानों के प्रतिनिधियों के साथ पहले दौर की बातचीत की, लेकिन बैठक बेनतीजा रही.

5 दिसंबर, 2020ः किसानों और केंद्र के बीच दूसरे दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही.

8 दिसंबर, 2020ः किसानों ने भारत बंद का आह्वान किया. अन्य राज्यों के किसानों ने भी इस आह्वान का समर्थन किया.

9 दिसंबर, 2020ः किसान नेताओं ने तीन विवादास्पद कानूनों में संशोधन के केंद्र सरकार के प्रस्ताव को खारिज किया.

11 दिसंबर, 2020ः भारतीय किसान संघ (बीकेयू) ने कृषि कानूनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.

13 दिसंबर, 2020ः केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने किसानों के विरोध प्रदर्शन में टुकड़े-टुकड़े गैंग का हाथ होने का आरोप लगाया.

30 दिसंबर, 2020ः सरकार और किसान नेताओं के बीच छठे दौर की बातचीत में कुछ प्रगति दिखी.

4 जनवरी, 2021ः सरकार और किसान नेताओं के बीच सातवें दौर की बातचीत भी अनिर्णायक रही .

7 जनवरी, 2021ः सुप्रीम कोर्ट 11जनवरी को नए कानूनों और विरोध प्रदर्शनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमत हुआ.

11 जनवरी, 2021ः सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के विरोध से निपटने के लिए केंद्र को फटकार लगाई.

12 जनवरी, 2021ः सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों के क्रियान्वयन पर रोक लगाई. कानूनों पर सिफारिशें करने के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया.

26 जनवरी, 2021ः गणतंत्र दिवस पर किसान संघों द्वारा बुलाई गई ट्रैक्टर परेड के दौरान हजारों प्रदर्शनकारी पुलिस से भिड़ गए. लाल किले में संपत्ति को नुकसान पहुंचाया.

29 जनवरी, 2021ः सरकार ने कृषि कानूनों को डेढ़ साल के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव रखा और कानून पर चर्चा के लिए एक संयुक्त समिति का गठन किया. किसानों ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया.

5 फरवरी, 2021ः दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम सेल ने किसान विरोध पर एक ‘टूलकिट‘ बनाने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की, जिसे किशोर पर्यावरणविद् ग्रेटा थुनबर्ग ने साझा किया था.

6 फरवरी, 2021ः विरोध करने वाले किसानों ने दोपहर 12बजे से दोपहर 3बजे तक तीन घंटे के लिए देशव्यापी ‘चक्का जाम‘ या सड़क नाकाबंदी की.

6 मार्च, 2021ः दिल्ली की सीमा पर किसानों ने पूरे किए 100दिन.

8 मार्च, 2021ः सिंघू सीमा विरोध स्थल के पास गोलियां चलाई गईं. कोई घायल नहीं हुआ .

15 अप्रैल, 2021ः हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चैटाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर किसानों के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का आग्रह किया.

27 मई, 2021ः किसानों ने छह महीने के आंदोलन को चिह्नित करने और सरकार के पुतले जलाने के लिए ‘काला दिवस‘ मनाया.

26 जून, 2021ः किसानों ने कृषि कानूनों के खिलाफ सात महीने के विरोध को चिह्नित करने के लिए दिल्ली तक मार्च निकाला.

22 जुलाई, 2021ः लगभग 200प्रदर्शनकारी किसानों ने संसद भवन के पास किसान संसद के समानांतर ‘‘मानसून सत्र‘‘ शुरू किया.

7 अगस्त, 2021ः 14विपक्षी दलों के नेता संसद भवन में मिले और दिल्ली के जंतर मंतर पर किसान संसद जाने का फैसला किया.

5 सितंबर, 2021ः उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए जाने के महीने, भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को चुनौती देते हुए, किसान नेताओं ने मुजफ्फरनगर में ताकत का एक बड़ा प्रदर्शन किया.

22 अक्टूबर, 2021ः सुप्रीम कोर्ट ने माना कि यह उन मामलों पर भी विरोध करने के लोगों के अधिकार के खिलाफ नहीं है जो विचाराधीन हैं, लेकिन यह स्पष्ट करता है कि ऐसे प्रदर्शनकारी सार्वजनिक सड़कों को अनिश्चित काल तक अवरुद्ध नहीं कर सकते.

29 अक्टूबर, 2021ः दिल्ली पुलिस ने गाजीपुर सीमा से बैरिकेड्स हटाना शुरू किया, जहां किसान केंद्र के कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं.

19  नवंबर, 2021ः पीएम नरेंद्र मोदी ने कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा की.