आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कांग्रेस ने बुधवार को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ लागू होने को ग्रामीण भारत के लिए बड़ा झटका करार दिया और कहा कि वह इस अधिनियम को निरस्त कराने और मनरेगा की बहाली के लिए सड़क से संसद तक अपना संघर्ष जारी रखेगी।
पार्टी के लोकसभा सदस्य और गामीण विकास संबंधी संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष सप्तगिरि उलाका ने यह दावा भी किया कि नई योजना के कारण राज्यों में अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मनरेगा एक मांग आधारित रोजगार योजना थी, जिसके तहत जितने लोगों ने रोजगार की मांग की, उसके आधार पर धन आवंटित किया जाता था। नई व्यवस्था में पहले से तय बजट के भीतर ही काम पूरा करना होगा।’’
कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि नई व्यवस्था के तहत राज्यों को धन और प्रशासनिक क्षमता का मिलान करना पड़ेगा, जिससे राज्यों पर रोजगार उपलब्ध कराने की और अधिक जिम्मेदारी आ जाएगी।
उलाका का कहना था कि मनरेगा में केंद्र सरकार श्रम लागत का लगभग पूरा वहन करती थी और सामग्री लागत में 60:40 का अनुपात लागू था, जिससे राज्यों पर अपेक्षाकृत कम बोझ पड़ता था।
उनके मुताबिक, नई योजना के तहत श्रम और सामग्री लागत को 60:40 के अनुपात में रखा गया है, जिससे अतिरिक्त वित्तीय दायित्व राज्यों पर आएगा।
उलाका ने केंद्र सरकार से वीबी-जी राम जी अधिनियम को निरस्त करने और मनरेगा को और अधिक मजबूती के साथ लागू करने की मांग की।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि ग्राम सभा को ही कार्यों के चयन का अधिकार मिलना चाहिए, मजदूरी बढ़ाकर 500 रुपये प्रतिदिन की जानी चाहिए और मनरेगा योजना की “आत्मा” को बहाल करते हुए हर हाथ को काम सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उलाका ने कहा, “यह सिर्फ कांग्रेस का विषय नहीं, बल्कि पूरे देश के गरीबों और मजदूरों का विषय है। हम इस मुद्दे पर संसद के भीतर और सड़क पर संघर्ष जारी रखेंगे।’’