आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) ने बुधवार को केरल विधानसभा की कार्यवाही का बहिष्कार किया, क्योंकि अध्यक्ष ने सरकार द्वारा केरल वित्त विधेयक को विषय समिति के पास भेजे बिना ही पेश करने के संबंध में विपक्षी गठबंधन की आपत्ति को खारिज कर दिया। इस विधेयक में कुछ शराब उत्पादों पर करों में भारी कटौती का प्रस्ताव है।
यह विरोध उस समय शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने विधेयक को विचारार्थ सदन के समक्ष प्रस्तुत किया।
एलडीएफ का तर्क था कि इस विधेयक को सदन में पेश किए जाने से पहले विषय समिति द्वारा विस्तृत जांच और समीक्षा के लिए भेजा जाना चाहिए था।
पूर्व वित्त मंत्री के.एन. बालगोपाल ने व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि यह विधेयक ‘‘बहुत जल्दबाजी’’ में लाया गया है और इसका मुख्य संबंध शराब नीति से है।
उन्होंने कहा, ‘‘आम तौर पर, इस तरह के वित्त विधेयक को संबंधित समिति के पास भेजा जाना चाहिए। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसमें शराब से जुड़े लगभग सभी मुख्य प्रावधान हैं। इसके अलावा शायद ही कोई और महत्वपूर्ण प्रावधान हो।’’
उन्होंने कहा कि सदस्यों को भरोसा दिलाया गया था कि इतने अहम प्रस्ताव को विस्तृत चर्चा के बाद ही लागू किया जाएगा, लेकिन उस वादे को पूरा नहीं किया गया।
बालगोपाल के अनुसार, पिछली एलडीएफ सरकार ने भी इसी तरह के प्रस्तावों पर विचार किया था, लेकिन उन्हें जानबूझकर लागू नहीं किया गया। उनका तर्क था कि आबकारी नीति में किसी भी बदलाव पर अमल करने से पहले उसके नीति-स्तरीय पहलुओं पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए।
वहीं, सतीशन ने इन आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि विधेयक को पेश करने में सभी कानूनी और प्रक्रियागत आवश्यकताओं का पालन किया गया है।