शिशु 'कमाई न करने वाला' सदस्य नहीं: न्यायाधिकरण का परिजनों को मुआवजा देने का आदेश

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 01-07-2026
Infant not a 'non-earning member': Tribunal orders compensation to family
Infant not a 'non-earning member': Tribunal orders compensation to family

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
महाराष्ट्र के ठाणे में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने 2018 में एक ट्रक की चपेट में आने से जान गंवाने वाले आठ महीने के बच्चे के माता-पिता को 15.10 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
 
न्यायाधिकरण ने कहा कि मुआवजे की गणना के लिए किसी बच्चे को "कमाई न करने वाला व्यक्ति" नहीं माना जा सकता।
 
एमएसीटी के अध्यक्ष और मुख्य जिला न्यायाधीश आर डी सावंत ने मंगलवार को पारित अपने आदेश में ट्रक मालिक दिनकर माने और एक निजी बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से मुआवजे की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया।
 
यह घटना छह जून 2018 को ठाणे के वागले एस्टेट में हुई थी जब शिकायतकर्ता मोहम्मद उस्मान महबूब नायक और उनकी पत्नी अपने एक रिश्तेदार के घर गए थे। उनका आठ महीने का बेटा सुल्तान ग्रिल लगे फुटपाथ पर खेल रहा था, तभी एक ट्रक ने तेज गति से पीछे से आते हुए लोहे की उस रेलिंग में जोरदार टक्कर मार दी।
 
टक्कर इतनी भयानक थी कि वह ग्रिल उखड़कर सीधे मासूम पर गिर गई, जिससे सिर पर गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस मामले में ट्रक चालक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया था।
 
न्यायाधिकरण ने कहा, "अगर ट्रक ने टक्कर न मारी होती और लोहे की रेलिंग न गिरती तो यह दुर्घटना नहीं होती। मृतक छोटा बच्चा था जो फुटपाथ पर खेल रहा था।"
 
अदालत शुल्क के उद्देश्य से माता-पिता ने शुरुआत में अपने दावे का मूल्यांकन केवल 1,00,000 रुपये रखा था, लेकिन न्यायाधिकरण ने उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए इस बात पर जोर दिया कि उसका कर्तव्य शुरुआती दावे से परे जाकर एक उचित मुआवजा देना है।