Vande Mataram is an emotional topic for us, BJP members are 'fake nationalists': Congress
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को ‘वंदे मातरम्’ को लेकर गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निशाना साधे जाने के बाद पलटवार करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छात्रों तथा राम मंदिर से कथित ‘चंदा चोरी’ जैसे विषयों से ध्यान भटकाने के लिए राष्ट्र गीत को लेकर विवाद खड़े करना चाहती है, जबकि उसके (भाजपा के) लोग ‘झूठे’ और ‘नकली’ राष्ट्रवादी हैं।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह ‘ट्राइड’ (परखे जा चुके) और ‘टायर्ड’ (थक चुके) हैं तथा अब उन्हें जल्द ही ‘रिटायर’ हो जाना चाहिए।
रमेश ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री शाह और भाजपा छात्रों के मुद्दे और राम मंदिर से ‘चंदा चोरी तथा ‘आस्था के साथ धोखा’ जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस उनके जाल में फंसने वाली नहीं है।
कांग्रेस महासचिव ने कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) द्वारा 1937 में वंदे मातरम् के संदर्भ में पारित प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्य विपक्षी दल उस वक्त सर्वोच्च नेताओं द्वारा किए गए फैसले का पालन करने के लिए वचनबद्ध है।
उनका कहना था, ‘‘वंदे मातरम् पर महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, आचार्य नरेन्द्र देव और उस समय के कुछ अन्य प्रमुख नेताओं द्वारा फैसला किया गया था। यह निर्णय रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर हुआ था।’’
उनके मुताबिक, वंदे मातरम् के सिर्फ दो अंतरे गाने के निर्णय का 90 साल पुराना इतिहास है तथा नेहरू, मोराजी देसाई, इंदिरा गांधी, चंद्रशेखर, वी पी सिंह, एचडी देवगौड़ा और अटल बिहारी वाजपेयी ने भी दो ही अंतरे गाए थे।
रमेश ने इस बात पर जोर दिया, ‘‘वंदे मातरम् हमारे के लिए कोई राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक मुद्दा है।’’
पार्टी की शीर्ष नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में इसको लेकर चर्चा हुई और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 1937 के सीडब्ल्यूसी के उस प्रस्ताव के कुछ अंश भी पढ़े जो महान नेताओं की मौजूदगी में पारित हुआ था और जिसमें वंदे मातरम् के दो अंतरों के गायन का निर्णय लिया गया था।