Border areas were neglected earlier, now they are the top priority of the Modi government: Rijiju
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने अरुणाचल प्रदेश में ‘‘चीन की ओर से घुसपैठ’’ के हालिया दावों को खारिज करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों की पहले उपेक्षा की जाती थी लेकिन अब ये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की ‘‘सर्वोच्च प्राथमिकता’’ हैं।
रीजीजू ने पूर्व रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी द्वारा 2013 में संसद में दिए उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें एंटनी ने स्वीकार किया था कि भारत में सीमावर्ती क्षेत्रों को अविकसित रखने की नीति लंबे समय तक अपनाई गई थी, जिसके कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और क्षमताओं के विकास में चीन ने भारत को पीछे छोड़ दिया।
हालांकि, एंटनी ने उसी भाषण में यह भी स्पष्ट किया था कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के सत्ता में आने से 20-25 वर्ष पहले यह नीति बदल दी गई थी और उसके बाद से लगातार भारतीय सरकारें सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सैन्य क्षमताओं को मजबूत कर रही हैं।
कांग्रेस नेता एंटनी ने दावा किया था कि तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने इन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए 'सबसे अधिक' काम किया।
लोकसभा में अरुणाचल पश्चिम का प्रतिनिधित्व करने वाले रीजीजू की यह टिप्पणी अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी क्षेत्र में ‘‘चीनी सैन्य गतिविधियों’’ को लेकर नये सिरे से चिंता जताए जाने के बीच आई है।
रीजीजू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘कुछ लोगों ने सीमा को लेकर यूं ही टिप्पणी कर दी। सीमावर्ती इलाके दुर्गम हैं, लेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मैं बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यों में तेजी लाने के लिए अरुणाचल प्रदेश के माजा, गालेमो और ताकसिंग इलाकों में गया था। सीमावर्ती क्षेत्रों की पहले उपेक्षा हुई लेकिन अब ये सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।’’
उन्होंने एक अन्य पोस्ट में सीमावर्ती बुनियादी ढांचे को लेकर कांग्रेस के रिकॉर्ड पर निशाना साधा।
रीजीजू ने कहा, ‘‘कांग्रेस नेताओं में ए. के. एंटनी जी बहुत ईमानदार थे। उन्होंने रक्षा मंत्री रहते हुए संसद में स्वीकार किया था कि कांग्रेस सरकार की नीति सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा नहीं बनाने की थी।’’
रीजीजू ने पूर्व रक्षा मंत्री एंटनी द्वारा छह सितंबर 2013 को लोकसभा में दिए गए बयान का उल्लेख किया। तत्कालीन रक्षा मंत्री ने उस समय स्वीकार किया था कि चीन ने सीमा पर भारत की तुलना में कहीं बेहतर बुनियादी ढांचा विकसित किया है और उन्होंने इस मामले में भारत के पिछड़ने के लिए आजादी के बाद दशकों तक अपनाई गई नीति को जिम्मेदार ठहराया था।