Tripura State Election Commission to conduct village committee elections in a single phase: Court
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को त्रिपुरा राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वह राज्य के जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद के तहत आने वाली सभी ग्राम समितियों के चुनाव 27 सितंबर को एक ही चरण में कराए।
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ का यह निर्देश तब आया, जब त्रिपुरा राज्य निर्वाचन आयोग का पक्ष रखने के लिए उपस्थित हुए अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने पूरा चुनाव एक ही चरण में कराने का सुझाव दिया।
राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अटॉर्नी जनरल की दलील से सहमति जताई।
पीठ ने कहा, ‘‘हम निर्वाचन आयोग के रुख से पूरी तरह से सहमत हैं। अगर यह एक ही चरण में पूरा हो जाए, तो बेहतर होगा। इससे ज्यादा सुरक्षा बलों की तैनाती नहीं करनी पड़ेगी।’’
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, ‘‘चूंकि पक्षकारों के बीच काफी हद तक सहमति है और प्रस्तावित तारीखों में केवल एक महीने का अंतर है, इसलिए हम निर्देश देते हैं कि ग्राम समितियों के चुनाव हलफनामे में प्रस्तावित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार कराए जाएं।’’
पीठ ने आदेश में कहा, ‘‘प्रतिवादियों और सभी प्राधिकारियों को समय-सारणी का पालन करने और चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के लिए जल्द से जल्द प्रयास करने चाहिए। इसके बाद समयसीमा नहीं बढ़ायी जाएगी।’’
उच्चतम न्यायालय टिपरा मोथा पार्टी के संस्थापक प्रद्योत देब बर्मन की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें प्राधिकारियों पर चुनाव न कराने का आरोप लगाया गया था।
बर्मन ने न्यायालय से अनुरोध किया था कि वह भारत निर्वाचन आयोग और त्रिपुरा राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दे कि वे ‘‘त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद अधिनियम-1994’ के तहत लंबे समय से लंबित ग्राम समितियों का चुनाव तत्काल करवाएं।