The sonic boom of meteors is as powerful as hundreds of tons of TNT. Learn how it works.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
पृथ्वी जिस अंतरिक्षीय वातावरण में स्थित है, वह पूरी तरह शांत नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार हमारा ग्रह सौरमंडल के निर्माण के समय से बचे असंख्य पथरीले और धात्विक मलबे के बीच से लगातार गुजरता है। अधिकांश छोटे कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते ही जलकर समाप्त हो जाते हैं और रात के आकाश में चमकते “टूटते तारे” के रूप में दिखाई देते हैं। लेकिन कभी-कभी बड़े या तेज गति से आने वाले पिंड के वायुमंडल में प्रवेश करते ही विस्फोट, तेज चमक और सोनिक बूम जैसी घटनाएं होती हैं, जो लोगों को चौंका देती हैं।
उल्का का सोनिक बूम वह तेज “धमाके जैसी आवाज़” होती है, जो तब सुनाई देती है जब कोई उल्कापिंड पृथ्वी के वायुमंडल में बहुत तेज गति से प्रवेश करता है और ध्वनि की गति से भी तेज चलता है।
हाल ही में 30 मई 2026 को अमेरिका के मैसाचुसेट्स और न्यू हैम्पशायर की सीमा क्षेत्र में एक तेज धमाके जैसी आवाज ने लोगों को हिला दिया। यह आवाज इतनी तेज थी कि इसे पूर्वी अमेरिका के कई हिस्सों में महसूस किया गया। बाद में नासा के वैज्ञानिक विश्लेषण में यह पुष्टि हुई कि यह घटना एक छोटे उल्कापिंड के पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने और उसके टूटने से हुई थी।
नासा के अनुसार, यह उल्का लगभग 3 से 5 फुट (लगभग 1 से 2 मीटर) व्यास का था। यह लगभग 42,000 मील प्रति घंटे (करीब 68,000 किलोमीटर प्रति घंटे) की गति से पृथ्वी की ओर आ रहा था। उल्का और लगातार घनी होती हवा के बीच के घर्षण ने, आसमान से तेज़ी से गुज़र रही उस चट्टान की गतिज ऊर्जा को बहुत जल्दी अत्यधिक गर्मी में बदल दिया।
वैज्ञानिकों के अनुसार, लगभग 40 मील (करीब 60 किलोमीटर) की ऊंचाई पर यह पिंड पूरी तरह संरचनात्मक रूप से टूट गया और एक तेज विस्फोट हुआ। इस विस्फोट में लगभग 300 टन टीएनटी के बराबर ऊर्जा मुक्त हुई। यही ऊर्जा आगे चलकर हवा में ‘शॉक वेव’ के रूप में फैल गई, जिसे सोनिक बूम कहा जाता है। जब कोई वस्तु ध्वनि की गति (761 मील प्रति घंटे या 1,225 किलोमीटर प्रति घंटे) से तेज चलती है, तो वह अपने आगे हवा को दबाकर एक शक्तिशाली तरंग पैदा करती है।
इस घटना में उल्का का अधिकांश हिस्सा वायुमंडल में ही जलकर नष्ट हो गया, जबकि बचा हुआ मलबा केप कॉड बे में सुरक्षित रूप से गिर गया। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी घटनाएं पृथ्वी पर अपेक्षाकृत सामान्य हैं, लेकिन उनके बहुत छोटे और अल्पकालिक होने के कारण पहले इन्हें अक्सर दर्ज नहीं किया जा पाता था। आज के समय में डैशकैम, सुरक्षा कैमरे, डिजिटल डोरबेल और स्मार्टफोन जैसे उपकरणों के कारण इन घटनाओं का रिकॉर्ड तुरंत मिल जाता है, जिससे वैज्ञानिकों को उनका अध्ययन करना आसान हो गया है।