आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने सोमवार को राज्य भर के सरकारी कार्यालयों और घरों में स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए जन आंदोलन चलाने का आह्वान किया तथा घरों से 100 प्रतिशत कचरा संग्रहण की आवश्यकता पर जोर दिया।
साहा की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कुछ महीने पहले केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत राज्य के 100 प्रतिशत घरेलू कचरा संग्रहण के दावे को खारिज करते हुए इसकी कवरेज 55 प्रतिशत आंकी थी।
यहां रवींद्र भवन में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए साहा ने जिलाधिकारियों से कचरा संग्रहण को सक्रिय रूप से लागू करने और उसका उचित निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा।
अगरतला नगर निगम (एएमसी) की विभिन्न पहलों के बावजूद अगरतला और अन्य शहरी क्षेत्रों में कचरे के ढेर लगने पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि स्वच्छता बनाए रखने के लिए लोगों को केवल निर्धारित स्थानों पर ही कचरा फेंकना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने एक आदेश में पर्यावरण संरक्षण के लिए जिलाधिकारियों को कचरा संग्रहण और निस्तारण संबंधी मानकों के अनुपालन की निगरानी करने का अधिकार दिया है। साथ ही दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है। इसलिए स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई होनी चाहिए।’’
मुख्यमंत्री ने स्वच्छता के लिए जन आंदोलन की वकालत करते हुए केंद्र सरकार की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि केवल 55 प्रतिशत परिवार ही कचरा संग्रहण व्यवस्था के दायरे में हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि राज्य विभिन्न कार्यक्रमों में 90 अंक प्राप्त कर सकता है, तो कचरा संग्रहण और निस्तारण में अच्छे अंक क्यों नहीं ला सकता? हमें घरों से 100 प्रतिशत कचरा संग्रहण सुनिश्चित करना होगा।’’
नगर निकायों द्वारा निर्धारित 60 रुपये मासिक कचरा संग्रहण शुल्क का भुगतान करने को लेकर कुछ निवासियों द्वारा किए जा रहे विरोध का उल्लेख करते हुए साहा ने अधिकारियों से कहा कि वे बकायेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करें।