आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी नीत धड़े की याचिका पर सुनवाई करते हुए निजी बैंक के अधिकारियों को पार्टी के खातों में जमा राशि की जानकारी देने का निर्देश दिया।
ममता नीत गुट ने पार्टी के बैंक खातों से लेन-देन पर लगी रोक को चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने बिधाननगर पुलिस को अगली सुनवाई के दौरान संबंधित शिकायत और उसके आधार पर दर्ज की गई प्राथमिकी की जांच से जुड़े रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया।
अदालत ने संबंधित निजी बैंक के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सात जुलाई तक तृणमूल के तीन खातों में जमा राशि की जानकारी अदालत के समक्ष रखें।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने इसी के साथ मामले की अगली सुनवाई आठ जुलाई के लिए सूचीबद्ध कर दी।
बिधाननगर पुलिस का पक्ष रखने के लिए पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अनुरोध किया कि वह इस मामले में कुछ दिनों के लिए कोई भी अंतरिम आदेश पारित न करें।
मेहता ने अदालत को बताया कि पुलिस ने मामले की जांच की है और वह पीठ के समक्ष ऐसे रिकॉर्ड पेश करेंगे जिनसे यह साबित हो सके कि पैसे का गबन किया जा रहा था।
उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि तृणमूल के दोनों गुटों में से कौन इन बैंक खातों का संचालन कर सकता है।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि अदालत इस मुद्दे पर विचार कर रही है कि क्या याचिका पर सुनवाई के दौरान इन तीनों खातों को संयुक्त विशेष अधिकारियों (जो अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे) के माध्यम से संचालित करने की अनुमति दी जा सकती है।
अदालत ने इस तथ्य का संज्ञान लिया कि प्राथमिकी 18 जून को शाम छह बजे दर्ज की गई और बैंक ने अगले ही दिन ममता बनर्जी नीत गुट को लिखित जानकारी दी कि उनके खातों से राशि निकाले पर रोक लगा दी गई है।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने सवाल किया कि यह किस जल्दबाजी में किया गया और जांच एजेंसी के पास शुरुआती तौर पर क्या सबूत थे।