वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण में बड़ी संख्या में रिजेक्शन, यूपी में 31 हजार से ज्यादा आवेदन रद्द

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 02-07-2026
Large number of rejections in the registration of Waqf properties; over 31,000 applications cancelled in UP.
Large number of rejections in the registration of Waqf properties; over 31,000 applications cancelled in UP.

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली  

वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण और पारदर्शी प्रबंधन के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए UMEED (यूएमईईडी) पोर्टल पर पंजीकरण और दस्तावेज अपलोड करने की निर्धारित समयसीमा अब समाप्त हो चुकी है। इस प्रक्रिया के दौरान देशभर से बड़ी संख्या में वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण कराया गया, लेकिन दस्तावेजों की कमी, सत्यापन में खामियों और तकनीकी कारणों से हजारों आवेदन निरस्त भी कर दिए गए। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, UMEED पोर्टल पर अपलोड किए गए आवेदनों में से 88,571 वक्फ संपत्तियों के आवेदन खारिज कर दिए गए, जो कुल आवेदनों का लगभग 11 प्रतिशत है। आवेदन निरस्त होने के मामलों में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर रहा, जहां 31,783 संपत्तियों के आवेदन रद्द किए गए। वहीं, प्रतिशत के हिसाब से राजस्थान में सबसे अधिक 37 प्रतिशत रिजेक्शन रेट दर्ज किया गया।

समयसीमा समाप्त होने के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने पंजीकरण की अवधि बढ़ाने की मांग की है। बोर्ड का कहना है कि कई राज्यों में वक्फ संपत्तियों के पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं और अनेक दस्तावेज दशकों पुराने होने के कारण उनका डिजिटलीकरण अभी तक संभव नहीं हो पाया है।

एक साल बाद भी पूरा नहीं हुआ वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण

वक्फ कानून लागू होने के एक वर्ष बाद भी देशभर में वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण और पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। कई राज्यों में अब भी हजारों संपत्तियों का पंजीकरण अधूरा है और अनेक मामलों में दस्तावेजों का सत्यापन लंबित है। केंद्र सरकार ने वक्फ संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के लिए UMEED पोर्टल की शुरुआत की थी। इसके लिए प्रारंभिक रूप से 6 महीने की समयसीमा निर्धारित की गई थी। बाद में विभिन्न राज्यों में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए संबंधित वक्फ ट्रिब्यूनलों ने अतिरिक्त 6 महीने की मोहलत भी दी। अब यह अतिरिक्त अवधि भी समाप्त हो चुकी है।

उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक वक्फ संपत्तियां, 31 हजार से अधिक आवेदन रद्द

उत्तर प्रदेश देश का वह राज्य है जहां वक्फ संपत्तियों की संख्या सबसे अधिक है। राज्य में लगभग 1.52 लाख वक्फ प्रतिष्ठान दर्ज हैं। इनमें से 1.03 लाख प्रतिष्ठानों को आधिकारिक मंजूरी प्राप्त है। जून 2026 की शुरुआत तक 1,31,113 प्रतिष्ठानों के दस्तावेज UMEED पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके थे, जबकि करीब 13,522 प्रतिष्ठानों के दस्तावेज समय पर अपलोड नहीं हो सके। दस्तावेजों की कमी और सत्यापन संबंधी कारणों से 31,783 वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण रद्द कर दिए गए। राज्य में तकनीकी समस्याओं और दस्तावेजों के सत्यापन में हो रही देरी को देखते हुए उत्तर प्रदेश वक्फ ट्रिब्यूनल ने पहले 6 महीने का अतिरिक्त समय दिया था, जिसकी अंतिम तिथि 5 जून 2026 निर्धारित की गई थी। अब यह समयसीमा भी समाप्त हो चुकी है।

देशभर में समयसीमा समाप्त, अब आगे की प्रक्रिया वक्फ बोर्ड और ट्रिब्यूनल तय करेंगे

वक्फ संपत्तियों को UMEED पोर्टल पर पंजीकृत कराने की अंतिम समयसीमा पहले 5 जून 2026 निर्धारित की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 30 जून 2026 कर दिया गया। अब समयसीमा समाप्त होने के बाद संबंधित राज्य वक्फ बोर्ड और वक्फ ट्रिब्यूनल उन मामलों पर निर्णय लेंगे, जिनमें निर्धारित अवधि के भीतर दस्तावेज अपलोड नहीं किए जा सके या सत्यापन पूरा नहीं हो पाया।

दिल्ली में बड़ी संख्या में आवेदन, हजारों संपत्तियां खारिज

दिल्ली में भी UMEED पोर्टल पर बड़ी संख्या में वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण कराया गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 6,29,527 संपत्तियां पंजीकरण के लिए प्रस्तुत की गईं, जिनमें से केवल 2,87,695 संपत्तियां वैध पाई गईं, जबकि 38,083 संपत्तियों के आवेदन खारिज कर दिए गए। जून 2026 तक कुल 7,66,470 संपत्तियों का पंजीकरण दर्ज किया गया, जिनमें से 5,43,597 संपत्तियों को स्वीकृति मिली।

बिहार ने पूरा किया शत-प्रतिशत पंजीकरण का दावा

बिहार में UMEED पोर्टल पर 12 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण किया गया है। राज्य के वक्फ बोर्ड अधिकारियों का दावा है कि बिहार में शत-प्रतिशत वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण पूरा कर लिया गया है। बिहार स्टेट सुन्नी वक्फ बोर्ड के अंतर्गत 2,819 इस्टेट की 6,700 संपत्तियां पंजीकृत की गई हैं, जबकि शिया वक्फ बोर्ड के अंतर्गत 307 इस्टेट की 5,955 संपत्तियों का पंजीकरण कराया गया है।

बिहार में अब अतिक्रमण हटाना प्राथमिकता

बिहार राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अल्हाज मोहम्मद इराशदुल्लाह के अनुसार, राज्य में सभी वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण पूरा कर लिया गया है। इसके लिए पहले ही जिला स्तर पर आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए थे। उन्होंने कहा कि अब बोर्ड की प्राथमिकता वक्फ संपत्तियों से अवैध अतिक्रमण हटाना है। बोर्ड को लगातार अतिक्रमण संबंधी शिकायतें प्राप्त होती रहती हैं। प्रत्येक शिकायत की रिकॉर्ड के आधार पर जांच की जाती है और आवश्यक होने पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया जाता है। साथ ही सभी जिलों से वक्फ संपत्तियों पर हुए अतिक्रमण की विस्तृत जानकारी भी मांगी गई है।

बिहार में वक्फ बोर्ड के पास करीब दो लाख एकड़ जमीन

अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, बिहार वक्फ बोर्ड के पास लगभग 2 लाख एकड़ भूमि दर्ज है। राज्य में सबसे अधिक वक्फ संपत्तियां पटना में हैं। इसके बाद मुजफ्फरपुर और गया का स्थान आता है। संपत्तियों की प्रकृति के अनुसार 20 प्रतिशत संपत्तियां दुकानों के रूप में दर्ज हैं, 16 प्रतिशत खाली जमीन, 15 प्रतिशत आवासीय मकान, 14 प्रतिशत मस्जिदें और 11 प्रतिशत कब्रिस्तान से संबंधित संपत्तियां हैं।

AIMPLB ने समयसीमा बढ़ाने की मांग दोहराई

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) का कहना है कि देशभर में बड़ी संख्या में वक्फ संपत्तियों के पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं। अनेक संपत्तियों के दस्तावेज कई दशक पुराने हैं, जिनका अभी तक डिजिटलीकरण नहीं हो सका है। ऐसे में यदि समयसीमा नहीं बढ़ाई गई तो कई वास्तविक वक्फ संपत्तियां आधिकारिक रिकॉर्ड से बाहर रह सकती हैं। इसी आधार पर बोर्ड ने केंद्र सरकार से पंजीकरण और दस्तावेज अपलोड करने की समयसीमा बढ़ाने की मांग की है।

 

 

सुप्रीम कोर्ट का रुख

हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सामान्य परिस्थितियों में पंजीकरण की समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। यदि किसी मामले में वास्तविक कठिनाई या विशेष परिस्थिति है तो संबंधित पक्ष वक्फ ट्रिब्यूनल के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकता है, जहां मामले के तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

केंद्र सरकार का उद्देश्य: पारदर्शी और डिजिटल रिकॉर्ड

केंद्र सरकार का कहना है कि UMEED पोर्टल शुरू करने का उद्देश्य देशभर की वक्फ संपत्तियों का पारदर्शी, प्रमाणित और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है, ताकि संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता आए और स्वामित्व तथा अतिक्रमण से जुड़े विवादों में कमी लाई जा सके। अब जबकि पंजीकरण की समयसीमा समाप्त हो चुकी है, निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार या विभिन्न राज्य वक्फ बोर्ड आगे किसी नई व्यवस्था, अतिरिक्त राहत या विशेष प्रावधान की घोषणा करते हैं या नहीं।