क्लाउड तकनीक से आसान होगी हज यात्रा: सऊदी अरब ने उठाया यह बड़ा कदम

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 02-07-2026
Cloud technology to make Hajj pilgrimage easier: Saudi Arabia takes this major step.
Cloud technology to make Hajj pilgrimage easier: Saudi Arabia takes this major step.

 

मलिक असगर हाशमी

हज और उमरा की पवित्र यात्रा पर जाने वाले दुनिया भर के करोड़ों अकीदतमंदों के लिए एक बहुत अच्छी खबर आई है। सऊदी अरब सरकार ने इस पाक सफर को अधिक सुगम, सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए अपनी डिजिटल सेवाओं को पूरी तरह बदल दिया है। सऊदी अरब के हज और उमरा मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अपने पूरे डेटा सेंटर को क्लाउड आधारित प्रणाली पर ट्रांसफर कर दिया है।

अब इस डेटा सेंटर का शत प्रतिशत माइग्रेशन पूरा हो चुका है। इस बड़े बदलाव के बाद अब पारंपरिक कंप्यूटर सर्वर गुजरे जमाने की बात हो गए हैं। इस नई तकनीक के आने से तीर्थयात्रियों को मिलने वाली तमाम डिजिटल सेवाएं अब बिना किसी रुकावट के बेहद तेज गति से काम करेंगी।

सऊदी प्रेस एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार इस कदम से मंत्रालय की तकनीकी क्षमता बहुत मजबूत हुई है। इसके साथ ही डिजिटल कामकाज में आने वाली रुकावटें हमेशा के लिए खत्म हो गई हैं। हज और उमरा मंत्री तौफीक अल रबिया ने इस ऐतिहासिक शुरुआत का उद्घाटन किया है।

उन्होंने बताया कि यह सफलता सऊदी अरब के शीर्ष नेतृत्व द्वारा यात्रियों की सुविधा के लिए चलाए जा रहे विशेष कार्यक्रम को समर्पित है। यह पूरा प्रोजेक्ट सऊदी विजन 2030 के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य एक ऐसा उन्नत डिजिटल इकोसिस्टम बनाना है जो मक्का और मदीना आने वाले हर यात्री के अनुभव को यादगार और सुखद बना सके।

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चौबीस साल पुराने सफर का नया डिजिटल अध्याय

सऊदी अरब का हज और उमरा डेटा सेंटर कोई नया विभाग नहीं है। इसकी स्थापना साल 2002 में की गई थी। पिछले चौबीस वर्षों से यह डेटा सेंटर मंत्रालय की सभी ऑनलाइन सेवाओं की रीढ़ की हड्डी रहा है। इतने लंबे समय तक पारंपरिक आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर के सहारे काम करने के बाद अब इसे पूरी तरह आधुनिक क्लाउड एनवायरनमेंट में बदल दिया गया है। यह बदलाव दुनिया की सबसे लेटेस्ट तकनीक के बिल्कुल अनुकूल है।

मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि यह क्लाउड ट्रांसफॉर्मेशन डिजिटल विकास की यात्रा में एक नया मील का पत्थर है। नया सिस्टम पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा लचीला और कुशल है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि हज और उमरा के व्यस्त सीजन में जब एक साथ करोड़ों लोग वेबसाइट या ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तब भी यह सिस्टम क्रैश नहीं होगा। डिजिटल प्रणालियों की यह तैयारी भविष्य में सेवाओं के विस्तार को भी आसान बनाएगी।

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नुसुक ऐप और नुसुक कार्ड से मिल रही बड़ी राहत

इस डेटा सेंटर की ताकत का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि यह हर साल 2 करोड़ से ज्यादा हज और उमरा तीर्थयात्रियों को संभालता है। मंत्रालय के प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म में इलेक्ट्रॉनिक हज और उमरा पोर्टल, नुसुक ऐप और नुसुक कार्ड शामिल हैं। यह सभी प्लेटफॉर्म अब सीधे क्लाउड से जुड़ चुके हैं।

वर्तमान में यह डेटा सेंटर करीब 70 से ज्यादा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सीधे जुड़ा हुआ है। नुसुक डिजिटल इकोसिस्टम का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या इस समय 5 करोड़ 10 लाख से भी अधिक हो चुकी है।

इस पूरे नेटवर्क के जरिए यात्रियों को 500 से ज्यादा डिजिटल सेवाएं सीधे उनके मोबाइल पर दी जा रही हैं। चाहे वीजा के लिए आवेदन करना हो, होटल बुक करना हो या पवित्र स्थलों के परमिट लेने हों, सब कुछ अब एक क्लिक पर उपलब्ध है। नुसुक कार्ड के जरिए यात्रियों की पहचान और उनकी सुरक्षा की निगरानी भी बेहद आसान हो गई है।

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भविष्य की तैयारियों के लिए मक्का में महामंथन

एक तरफ जहां तकनीकी स्तर पर इतने बड़े बदलाव हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर भी अगले हज सीजन की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। मक्का प्रिंसिपैलिटी एजेंसी फॉर हज एंड उमरा अफेयर्स ने इस दिशा में एक बड़ी पहल की है। उन्होंने पिलग्रिम्स एक्सपीरियंस प्रोग्राम के हज प्रोजेक्ट्स मैनेजमेंट ऑफिस के साथ मिलकर विशेष चर्चा सत्रों का आयोजन किया।

इन उच्च स्तरीय बैठकों का आयोजन मक्का के गवर्नर और हज-उमरा की स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रिंस खालिद बिन फैसल के निर्देशों पर किया गया। पूरी प्रक्रिया की निगरानी मक्का के डिप्टी गवर्नर प्रिंस सऊद बिन मिशाल ने की।

पवित्र स्थलों पर तीर्थयात्रियों की सेवा में लगी 60 से अधिक विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने इस तीन दिवसीय बैठक में हिस्सा लिया। इस महामंथन का मुख्य उद्देश्य पिछले हज सीजन के अनुभवों की समीक्षा करना था। सभी विभागों ने मिलकर अपने काम को और बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव और सिफारिशें पेश की हैं।

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बेहतर तालमेल से दूर होंगी जमीनी चुनौतियां

इन बैठकों में आए सुझावों में सबसे ज्यादा जोर इस बात पर दिया गया कि सभी विभाग आपस में तालमेल को और मजबूत करें। इसके तहत आने वाले समय की योजनाएं पहले से तैयार की जाएंगी ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। सभी भाग लेने वाली संस्थाओं के बीच उनकी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को लेकर एक स्पष्ट समझ बनाने पर सहमति बनी है।

बैठक में शामिल अधिकारियों ने इस बात पर चर्चा की कि कैसे परिचालन से जुड़ी संभावित चुनौतियों को समय रहते पहचाना जाए और उन्हें दूर किया जाए। सरकार का एकमात्र लक्ष्य दुनिया भर से आने वाले अल्लाह के मेहमानों को उच्चतम स्तर की सेवाएं प्रदान करना है। अब जब तकनीक के स्तर पर 100 प्रतिशत क्लाउड माइग्रेशन हो चुका है, तो जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों को भी डेटा हासिल करने और फैसले लेने में बहुत आसानी होगी।

तकनीक और बेहतर प्रबंधन का यह अनूठा संगम इस बात का गवाह है कि सऊदी अरब अपनी प्राचीन परंपराओं को सहेजते हुए आधुनिक युग की तकनीकों को अपनाने में सबसे आगे है। आने वाले दिनों में यह डिजिटल क्रांति हर एक हाजी के सफर को और ज्यादा आसान और आरामदायक बनाने वाली है। दुनिया के किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति अब बेहद सहजता के साथ अपनी इस पवित्र यात्रा की योजना बना सकता है।