सेना प्रमुख के हाथों वेटरन अचीवर्स अवार्ड से सम्मानित हुए लियाकत अली

Story by  फरहान इसराइली | Published by  [email protected] | Date 02-07-2026
Liyakat Ali honored with the Veteran Achievers Award by the Army Chief.
Liyakat Ali honored with the Veteran Achievers Award by the Army Chief.

 

फरहान इसराइली /जयपुर

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के धनूरी गांव का नाम एक बार फिर देश के पटल पर गर्व से चमका है। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने नई दिल्ली के माणिक शॉ सेंटर में आयोजित एक विशेष और भव्य समारोह में धनूरी के लाल रिसालदार मेजर ऑनरेरी कैप्टन लियाकत अली खान (रिटायर्ड) को प्रतिष्ठित 'वेटरन अचीवर्स अवार्ड' से सम्मानित किया है। यह राष्ट्रीय सम्मान मिलने के बाद से ही पूरे राजस्थान और विशेषकर कायमखानी समाज में खुशी और जश्न का माहौल बना हुआ है। सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक कैप्टन लियाकत अली को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

यह गौरवशाली पुरस्कार भारतीय सेना की उस अनूठी परंपरा का हिस्सा है जो मानती है कि देश की सेवा सिर्फ वर्दी पहनने तक सीमित नहीं होती। सेना अपने उन जांबाज पूर्व सैनिकों और अधिकारियों को इस सम्मान से नवाजती है जो सेवानिवृत्ति के बाद भी थक कर घर नहीं बैठते।

बल्कि वे अपने जीवन की दूसरी पारी में भी राष्ट्र निर्माण, समाज सेवा, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, कचरा प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा और युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित करने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में पूरी ऊर्जा के साथ जुटे रहते हैं। कैप्टन लियाकत अली ने इन सभी पैमानों पर खुद को एक आदर्श समाज सेवक साबित किया है।

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32 साल सरहद पर पहरा और 23 साल से निस्वार्थ समाज सेवा

कैप्टन लियाकत अली खान का सेना में रहने से लेकर रिटायर होने तक का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने भारतीय सेना की प्रसिद्ध 73 आर्मर्ड रेजिमेंट सहित विभिन्न यूनिट्स में 32 साल से भी ज्यादा समय तक देश की सीमाओं की रक्षा की। साल 2003 में वे अपनी शानदार सैन्य सेवा पूरी कर सेवानिवृत्त हुए। सेना की वर्दी उतारने के बाद उन्होंने आराम करने के बजाय समाज के वंचित और जरूरतमंद लोगों की सेवा को ही अपने जीवन का एकमात्र नया लक्ष्य बना लिया।

पिछले 23 वर्षों से वे लगातार अपनी टीम के साथ मिलकर राजस्थान के दूर-दराज के गांवों का दौरा कर रहे हैं। इस दौरान उनका मुख्य ध्यान पूर्व सैनिकों, बुजुर्ग फौजियों और वीर नारियों (शहीदों की पत्नियों) की मदद करने पर रहता है। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर पूर्व सैनिकों और वीर नारियों को अपनी पेंशन से जुड़ी तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

कैप्टन लियाकत अली अपनी टीम के साथ मिलकर ऑन-द-स्पॉट इन जटिल पेंशन समस्याओं का समाधान करवाते हैं। इसके साथ ही वे इन परिवारों को सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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शहीदों की खान के नाम से मशहूर है धनूरी गांव

कैप्टन लियाकत अली खान राजस्थान के जिस धनूरी ठिकाने (गांव) से ताल्लुक रखते हैं, उसका अपना एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक और गौरवशाली सैन्य इतिहास रहा है। झुंझुनूं जिले का धनूरी गांव पूरे भारत में 'फौजियों की खान' के रूप में प्रसिद्ध है। इस गांव की मिट्टी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह भारत के उन चुनिंदा गांवों में शीर्ष पर आता है जिसने देश की रक्षा के लिए सबसे ज्यादा शहीदों की कुर्बानी दी है।

यहां के कायमखानी समुदाय के लगभग हर घर से कोई न कोई सदस्य भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा कर रहा है या कर चुका है। जयपुर और पूरे राजस्थान की इस बहादुर कौम ने समय-समय पर अपनी देशभक्ति और अदम्य साहस का परिचय देकर देश का सिर ऊंचा किया है। कैप्टन लियाकत अली को मिला यह सम्मान इसी शानदार परंपरा की अगली कड़ी माना जा रहा है।

माणिक शॉ सेंटर में देश के सात दिग्गजों का हुआ सम्मान

नई दिल्ली के माणिक शॉ सेंटर में आयोजित इस गरिमामयी समारोह के दौरान थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने देश भर से चुने गए कुल 7 पूर्व जांबाज सैनिकों को 'वेटरन अचीवर्स अवार्ड' से सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान सेना प्रमुख ने इन सभी पूर्व सैनिकों के जज्बे की खुलकर तारीफ की।

उन्होंने कहा कि सेना का यह पुरस्कार 'सेवा एक आजीवन यात्रा है' के मूल सिद्धांत पर काम करता है। यह सम्मान उन दिग्गजों के अनुशासन, अद्वितीय नेतृत्व क्षमता और समाज के प्रति उनके गहरे समर्पण को रेखांकित करता है जो रिटायरमेंट के बाद भी समाज के उत्थान के लिए लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

कैप्टन लियाकत अली खान को यह सम्मान मिलने के बाद से उनके पैतृक गांव धनूरी और पूरे झुंझुनूं जिले में हर्ष का माहौल है। इंटरनेट मीडिया पर हर वर्ग और हर समाज के लोग उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर गर्व जता रहे हैं। लोगों का कहना है कि कैप्टन साहब जैसे लोग समाज के असली और अनमोल हीरे हैं जो आने वाली युवा पीढ़ी को देश सेवा और समाज कल्याण के मार्ग पर चलने के लिए हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।