जब्त किये गये दस्तावेजों के 'दुरुपयोग' पर रोक लगाने का अनुरोध किया

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 09-01-2026
TMC requests court to stop 'misuse' of documents seized by ED
TMC requests court to stop 'misuse' of documents seized by ED

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक के कार्यालय और इसके प्रमुख के आवास पर ईडी द्वारा की गई छापेमारी के खिलाफ याचिका दायर कर तलाश अभियान के दौरान जब्त किये गये दस्तावेजों के ‘‘दुरुपयोग और प्रसार’’ पर रोक लगाने का अनुरोध किया है।
 
पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आगामी विधानसभा चुनाव में टीएमसी के उपयोग के लिए रखे गए संवेदनशील और गोपनीय राजनीतिक डाटा को जब्त कर लिया और इससे ‘‘मनमाने और दुर्भावनापूर्ण तरीके से सत्ता के दुरुपयोग’’ का पता चलता है।
 
‘पीटीआई’ को याचिका का सारांश (सिनॉप्सिस) प्राप्त हुआ है, जिसमें जांच एजेंसी द्वारा आठ जनवरी को धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 17 के तहत की गई तलाशी और जब्ती कार्रवाई का उल्लेख है।
 
ईडी ने दावा किया कि ये अभियान कथित तौर पर करोड़ों रुपये के कोयला चोरी घोटाले की जांच का हिस्सा थे।
 
टीएमसी ने अपनी याचिका में कहा, ‘‘जब्त की गई सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक डाटा में गोपनीय राजनीतिक डाटा/जानकारी/दस्तावेज शामिल हैं, जो आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार में उपयोग की जाने वाली अभियान रणनीति, आंतरिक आकलन, शोध सामग्री, संगठनात्मक समन्वय और मतदाता सूची से संबंधित डाटा से जुड़े हैं।’’
 
इसमें कहा गया है, ‘‘उक्त सामग्रियों का किसी भी अपराध या कथित अपराध की आय से कोई प्रत्यक्ष और यहां तक ​​कि दूरस्थ संबंध भी नहीं है, और ये धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002 के अंतर्गत जांच के दायरे में नहीं आती हैं।’’
 
तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि ईडी की कार्रवाई का उद्देश्य जांच के बहाने ‘‘एक स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने के स्पष्ट इरादे से याचिकाकर्ता के मतदाता सूची प्रबंधन, अभियान योजना और राजनीतिक रणनीति तक गैरकानूनी रूप से पहुंच बनाना और उसे नियंत्रित करना’’ था।
 
इसने कहा, ‘‘इस प्रकार की कार्रवाई याचिकाकर्ता के अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार और अनुच्छेद 19 के तहत लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सार्थक रूप से भाग लेने के संवैधानिक अधिकार का अनुचित उल्लंघन है।’’