पुणे (महाराष्ट्र),
पुणे (महाराष्ट्र), 10 जनवरी — खड़की सैन्य स्टेशन के डिग्गी रेंज में 8 और 9 जनवरी को एक महत्वपूर्ण सैन्य–नागरिक समन्वय अभ्यास ‘सांझा शक्ति’ का सफल आयोजन किया गया। यह अभ्यास दक्षिणी कमान के अंतर्गत एमजी एंड जी एरिया के तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसका उद्देश्य जटिल सुरक्षा चुनौतियों और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए सैन्य और नागरिक एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और संयुक्त तैयारियों को परखना था।
इस दो दिवसीय अभ्यास में भारतीय सेना के साथ-साथ 16 प्रमुख नागरिक एजेंसियों ने भाग लिया। इनमें महाराष्ट्र पुलिस, फोर्स वन, अग्निशमन विभाग और अन्य आपात सेवा इकाइयाँ शामिल थीं। कुल मिलाकर 350 से अधिक सैन्य और नागरिक कर्मियों ने इस अभ्यास में सक्रिय सहभागिता की। अभ्यास का मुख्य फोकस आपसी समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और बदलते सुरक्षा एवं आपात परिदृश्यों में संयुक्त कार्रवाई को मजबूत करना था।
‘सांझा शक्ति’ अभ्यास के दौरान कई यथार्थपरक परिदृश्यों का सृजन किया गया, ताकि मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी), संचार प्रणालियों और विभिन्न स्तरों पर निर्णय लेने की क्षमता का परीक्षण किया जा सके। इन परिदृश्यों के माध्यम से यह देखा गया कि संकट की स्थिति में विभिन्न एजेंसियाँ कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से एक-दूसरे के साथ समन्वय स्थापित कर सकती हैं।
अभ्यास में शामिल सभी नागरिक एजेंसियों ने भारतीय सेना की इस पहल की सराहना की और सार्वजनिक सुरक्षा, त्वरित संकट प्रबंधन तथा सैन्य–नागरिक सहयोग को और मजबूत करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। अधिकारियों ने माना कि ऐसे अभ्यास वास्तविक आपात स्थितियों में जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर एमजी एंड जी एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल डी.एस. कुशवाह (एवीएसएम, एसएम) ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने बाढ़ राहत अभियानों में भारतीय सेना की प्रभावी भूमिका, रियर एरिया सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं और पूर्व सैनिकों व वीर नारियों के लिए चलाए जा रहे कल्याणकारी प्रयासों पर प्रकाश डाला।
लेफ्टिनेंट जनरल कुशवाह ने कहा कि वर्तमान समय में राज्य की सभी इकाइयों और भारतीय सेना के बीच मजबूत तालमेल अत्यंत आवश्यक है, ताकि आंतरिक क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके, प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मानवीय सहायता प्रदान की जा सके और पूर्व सैनिकों तथा उनके परिवारों को समुचित सहयोग मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि ‘सांझा शक्ति’ जैसे संयुक्त अभ्यास उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए परिचालन तैयारियों और आपसी समन्वय को और अधिक सुदृढ़ बनाते हैं।
खड़की सैन्य स्टेशन के डिग्गी रेंज में 8 और 9 जनवरी को एक महत्वपूर्ण सैन्य–नागरिक समन्वय अभ्यास ‘सांझा शक्ति’ का सफल आयोजन किया गया। यह अभ्यास दक्षिणी कमान के अंतर्गत एमजी एंड जी एरिया के तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसका उद्देश्य जटिल सुरक्षा चुनौतियों और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए सैन्य और नागरिक एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और संयुक्त तैयारियों को परखना था।
इस दो दिवसीय अभ्यास में भारतीय सेना के साथ-साथ 16 प्रमुख नागरिक एजेंसियों ने भाग लिया। इनमें महाराष्ट्र पुलिस, फोर्स वन, अग्निशमन विभाग और अन्य आपात सेवा इकाइयाँ शामिल थीं। कुल मिलाकर 350 से अधिक सैन्य और नागरिक कर्मियों ने इस अभ्यास में सक्रिय सहभागिता की। अभ्यास का मुख्य फोकस आपसी समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और बदलते सुरक्षा एवं आपात परिदृश्यों में संयुक्त कार्रवाई को मजबूत करना था।
‘सांझा शक्ति’ अभ्यास के दौरान कई यथार्थपरक परिदृश्यों का सृजन किया गया, ताकि मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी), संचार प्रणालियों और विभिन्न स्तरों पर निर्णय लेने की क्षमता का परीक्षण किया जा सके। इन परिदृश्यों के माध्यम से यह देखा गया कि संकट की स्थिति में विभिन्न एजेंसियाँ कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से एक-दूसरे के साथ समन्वय स्थापित कर सकती हैं।
अभ्यास में शामिल सभी नागरिक एजेंसियों ने भारतीय सेना की इस पहल की सराहना की और सार्वजनिक सुरक्षा, त्वरित संकट प्रबंधन तथा सैन्य–नागरिक सहयोग को और मजबूत करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। अधिकारियों ने माना कि ऐसे अभ्यास वास्तविक आपात स्थितियों में जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर एमजी एंड जी एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल डी.एस. कुशवाह (एवीएसएम, एसएम) ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने बाढ़ राहत अभियानों में भारतीय सेना की प्रभावी भूमिका, रियर एरिया सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं और पूर्व सैनिकों व वीर नारियों के लिए चलाए जा रहे कल्याणकारी प्रयासों पर प्रकाश डाला।
लेफ्टिनेंट जनरल कुशवाह ने कहा कि वर्तमान समय में राज्य की सभी इकाइयों और भारतीय सेना के बीच मजबूत तालमेल अत्यंत आवश्यक है, ताकि आंतरिक क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके, प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मानवीय सहायता प्रदान की जा सके और पूर्व सैनिकों तथा उनके परिवारों को समुचित सहयोग मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि ‘सांझा शक्ति’ जैसे संयुक्त अभ्यास उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए परिचालन तैयारियों और आपसी समन्वय को और अधिक सुदृढ़ बनाते हैं।