तिरुवनंतपुरम
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता ए. के. बालन ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि यदि यूडीएफ जमात-ए-इस्लामी के समर्थन से केरल की सत्ता में आता है, तो यह राज्य के लिए “विनाशकारी” साबित होगा। उन्होंने यह बयान शनिवार को तिरुवनंतपुरम में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान दिया।
बालन ने कहा कि वह इस मुद्दे पर अपनी चेतावनी को बार-बार दोहराते रहेंगे और जनता को इसके संभावित परिणामों के प्रति सतर्क करेंगे। उनका आरोप था कि यूडीएफ सत्ता हासिल करने के लिए उन ताकतों का सहारा ले रहा है, जिनकी विचारधारा केरल की धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि इस तरह के राजनीतिक गठजोड़ राज्य की सामाजिक एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
संवाददाता सम्मेलन के दौरान माकपा नेताओं ने ‘कुरान’ की एक प्रति भी प्रदर्शित की और उसमें ‘मुनाफिकों’ (पाखंडी या नकली आस्तिकों) का उल्लेख होने की बात कही। बालन ने कहा कि मुनाफिक वे होते हैं जो बाहर से कुछ और दिखते हैं, लेकिन भीतर से किसी और एजेंडे पर काम करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह खुद को इस श्रेणी में नहीं मानते।
बालन ने कहा, “मैं वैसा नहीं हूं। मैं एक आस्तिक भी हूं और एक कम्युनिस्ट भी। मेरी निष्ठा मजदूर वर्ग और आम लोगों के प्रति है।” उन्होंने यह भी कहा कि कम्युनिस्ट विचारधारा और सामाजिक न्याय के सिद्धांत उनके लिए सर्वोपरि हैं और वे किसी भी तरह के पाखंड या अवसरवादी राजनीति का समर्थन नहीं करते।
माकपा नेता ने यह भी टिप्पणी की कि यदि जमात-ए-इस्लामी पर की गई उनकी आलोचनाओं के कारण उन पर मानहानि का मामला दर्ज किया जाता है और उन्हें जेल जाना पड़ता है, तो वे जेल में रहते हुए सबसे पहले कुरान का पूरा अध्ययन करेंगे। उनके इस बयान को राजनीतिक हलकों में एक चुनौती और प्रतीकात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
बालन के इस तीखे बयान से केरल की राजनीति में एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है। जहां माकपा इसे वैचारिक लड़ाई के रूप में पेश कर रही है, वहीं यूडीएफ और उससे जुड़े दलों की ओर से इस पर प्रतिक्रिया आना अभी बाकी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और गहराने की संभावना है।






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