नासिर पहलवान: मेवात के युवाओं के लिए प्रेरणा की नई मिसाल

Story by  यूनुस अल्वी | Published by  [email protected] | Date 10-01-2026
Nasir Pehlwan: A new source of inspiration for the youth of Mewat.
Nasir Pehlwan: A new source of inspiration for the youth of Mewat.

 

यूनुस अलवी | मेवात/हरियाणा

मेवात, जो अक्सर अपने पिछड़ेपन और विवादों के कारण सुर्खियों में रहता है, उसी भूमि से एक ऐसी हस्ती ने जन्म लिया है जिसने न सिर्फ हरियाणा, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। यह नाम है नासिर पहलवान, जिन्होंने अपने संघर्ष, कड़ी मेहनत और अनुशासन के बल पर अपने जीवन को सफलता की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
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नासिर का जन्म उटावड़ गांव में हुआ, जहां पहलवानी एक विरासत की तरह चली आ रही थी। नासिर के पिता और दादा भी इस परंपरा से जुड़े थे, और यही कारण था कि नासिर के लिए पहलवानी सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि पारिवारिक धरोहर थी। सात साल की उम्र में उन्हें अखाड़े में भेजा गया, लेकिन शुरुआत में उन्हें उस जीवन की सख्ती और चुनौती का सामना करना पड़ा। पहले कुछ दिन तो वह अखाड़े से भाग गए, लेकिन उनके पिता ने हार नहीं मानी और उन्हें गुरु हनुमान अखाड़ा में भेज दिया। यही अखाड़ा नासिर के जीवन का अहम मोड़ साबित हुआ।
 
दिल्ली के गुरु हनुमान अखाड़े में नासिर का सामना असली कुश्ती से हुआ। शुरुआत में यह यात्रा कठिन थी, लेकिन नासिर ने गुरु और पिता के विश्वास पर भरोसा किया और कठिनाईयों को पार किया। 17–18 साल की उम्र में भारत केसरी का खिताब जीतने के बाद, नासिर की पहचान पूरे देश में फैल गई। वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड, सिल्वर और वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
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कुश्ती का खेल हमेशा जोखिमों से भरा होता है, और नासिर के करियर में एक गंभीर चोट ने उन्हें डेढ़ साल तक अखाड़े से दूर रखा। लेकिन इस कठिन समय ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से और मजबूत बना दिया। उनका कहना है, “अच्छा वक्त हो तो सब साथ, बुरा हो तो इंसान अकेला।”
 
सोशल मीडिया पर ट्रोल होने के बावजूद, नासिर ने धर्म और जाति के भेदभाव को नकारते हुए कहा, “पहलवान की कोई जाति या धर्म नहीं होता। कुश्ती 20 मिनट की दुश्मनी है, उसके बाद सब भाई-भाई।” उन्होंने इस बात को साबित किया कि अखाड़े में असली जीत परंपरा, एकता और भाईचारे की होती है।
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नासिर पहलवान का मानना है कि मेवात में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन यहां के युवाओं को सही संसाधन और मार्गदर्शन की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा, “अगर मेवात में सही ग्राउंड, कोच और सुविधाएं मिल जाएं, तो यहां से हजारों नासिर पहलवान निकल सकते हैं।” वह युवाओं को सलाह देते हैं कि शॉर्टकट से बचें और मेहनत से सफलता प्राप्त करें।
 
नासिर पहलवान के लिए अखाड़ा सिर्फ कुश्ती सीखने का स्थान नहीं, बल्कि यह जीवन के महत्वपूर्ण पाठों को सिखाने वाली जगह है। उनका मानना है कि अगर आज के युवा अखाड़े की संस्कृति को समझें, तो समाज की आधी समस्याएं खुद ही हल हो जाएंगी।
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नासिर की सफलता यह साबित करती है कि अगर मेहनत सच्ची हो और गुरु का मार्गदर्शन मिले, तो मेवात की मिट्टी भी सोना उगल सकती है। उनकी कहानी मेवात के उन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो अक्सर हालातों के डर से आगे बढ़ने से कतराते हैं। आज नासिर पहलवान सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि मेवात के युवाओं की आशा और प्रेरणा बन चुके हैं, और उनकी कहानी एक मिसाल है कि अगर मेहनत और नीयत सही हो, तो हर मुश्किल को पार किया जा सकता है।