आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
अभिनेत्री तिलोत्तमा शोम ने कहा है कि अभिनेता दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलज’ को ओटीटी मंच जी5 से हटाया जाना ‘‘दुखद’’ है और यह भारतीय सिनेमा में रचनात्मक स्वतंत्रता के सामने बनी हुई चुनौतियों को रेखांकित करता है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित इस फिल्म का प्रीमियर तीन जुलाई को जी5 पर हुआ था, लेकिन दो दिन बाद इसे मंच से हटा दिया गया।
बाद में सरकारी सूत्रों ने कहा था कि फिल्म को सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण हटाया गया।
शोम ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘यह वास्तव में बहुत कठिन है। किसी फिल्मकार के लिए इतनी मेहनत करने के बाद ऐसा होना बेहद दुखद है। लोकतंत्र में हमें किसी फिल्म को देखने या नहीं देखने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। इस मामले में हमें परिपक्वता दिखानी चाहिए। अपनी पसंद की कहानियां कहने की आजादी नहीं मिलना बहुत दुखद है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह केवल ‘सतलुज’ की बात नहीं है। अपनी पसंद की कहानी अपनी तरह से कहने की स्वतंत्रता शुरू से ही एक चुनौती रही है।’’
पहले ‘पंजाब '95’ शीर्षक से बनी यह फिल्म तीन वर्ष से अधिक समय तक सेंसर बोर्ड के पास अटकी रही। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने फिल्म में 127 से अधिक कट लगाने का सुझाव दिया था।