आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
महाराष्ट्र विधानसभा ने रामटेक में ऐतिहासिक राम मंदिर के सार्वजनिक न्यास का पुनर्गठन करने के लिए शुक्रवार को एक विधेयक पारित किया। हालांकि, विपक्ष ने राजनीतिक नेताओं और वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों का सामना कर रहे लोगों को संस्थान के प्रबंधन से दूर रखने के लिए सख्त पात्रता नियम बनाने की मांग की।
सरकार की सीधी निगरानी के तहत श्री राम मंदिर ट्रस्ट (रामटेक) स्थापित करने के विषय पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मंत्री आशीष जायसवाल ने कहा कि मंदिर की चल व अचल संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक खास प्रबंध समिति और एक कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। अभी इन संपत्तियों का प्रबंधन एक उपमंडलीय अधिकारी करते हैं।
रामटेक एक तीर्थ स्थल है जो नागपुर जिले में स्थित है।
विपक्ष ने सरकार से प्रस्तावित श्री राम मंदिर देवस्थान ट्रस्ट (रामटेक) विधेयक को एक संयुक्त प्रवर समिति को भेजने का आग्रह किया। विपक्षी दलों ने उन प्रावधानों पर आपत्ति जताई जिनके तहत राजनीतिक नेताओं को मंदिर न्यास में नियुक्त किया जा सकता है। विपक्ष ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों की भी मांग की।
चर्चा में हिस्सा लेते हुए, राकांपा (शप) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने न्यास में नेताओं को नियुक्त करने के खिलाफ आगाह किया और कहा कि इससे मंदिर के कामकाज का राजनीतिकरण हो जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि न्यास में राजनीतिक प्रतिनिधियों को शामिल करने से ‘‘इतना अधिक भ्रष्टाचार होगा कि अयोध्या मंदिर का (चढ़ावा चोरी) मामला भी पीछे छूट जाएगा।’’