आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) वी. रामासुब्रमण्यम ने अधिकारियों से बंधुआ मजदूरी के मामलों से निपटते समय सतर्क रहने का आग्रह किया है।
उन्होंने इस तरह के मामलों का पता लगाने और जरूरत पड़ने पर मजदूरों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए हेल्पलाइन शुरू करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
एनएचआरसी ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि आयोग ने नौ जुलाई को हरियाणा के विभिन्न जिलों में ईंट-भट्टों से जुड़े कथित बंधुआ मजदूरी के 86 मामलों की ऑनलाइन सुनवाई की।
न्यायमूर्ति रामासुब्रमण्यम की अध्यक्षता में हुई इस सुनवाई में राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों और हरियाणा के विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों ने हिस्सा लिया।
उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों में अभिलेखों की ‘‘समुचित पड़ताल संबंधित सरकारी अधिकारियों ने नहीं की।’’ आयोग ने एक बयान में कहा, ‘‘इस कारण उनके पास मजदूरों को बंधुआ मजदूर घोषित करने के लिए विश्वसनीय साक्ष्य नहीं थे।’’
आयोग के प्रमुख ने अधिकारियों से बंधुआ मजदूरी के मामलों से निपटते समय सतर्क रहने का आग्रह किया।
उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि किसी शिकायत की जांच के लिए टीम गठित करते समय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा 14 मई को जारी पत्र के माध्यम से जारी ‘बंधुआ मजदूरों की पहचान और बचाव तथा दोषियों के अभियोजन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया’ में निर्धारित प्रावधानों का पालन करें।
उन्होंने इस बात पर जोर भी दिया कि एक हेल्पलाइन शुरू की जानी चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर मजदूर सहायता मांग सकें और बंधुआ मजदूरी की घटनाओं का पता लगाने में मदद मिल सके।