दिल्ली दंगों के मामले में आज शरजील इमाम, उमर खालिद की जमानत याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 05-01-2026
The Supreme Court will deliver its verdict today on the bail applications of Sharjeel Imam and Umar Khalid in the Delhi riots case.
The Supreme Court will deliver its verdict today on the bail applications of Sharjeel Imam and Umar Khalid in the Delhi riots case.

 

नई दिल्ली,

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को 2020 के उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में शरजील इमाम, उमर खालिद और अन्य आरोपी की जमानत याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाएगा। ये आरोपी दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दे रहे हैं, जिसमें उन्हें यूएपीए (अवैध गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम) के तहत जमानत देने से मना किया गया था।

अदालत की बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया शामिल हैं, गोल्फिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद की जमानत याचिकाओं पर भी निर्णय सुनाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद 10 दिसंबर को अपना फैसला सुरक्षित रखा था।

जमानत याचिकाओं की सुनवाई के दौरान वकीलों ने मुख्य रूप से आरोपियों की लंबी हिरासत और मुकदमे की शुरूआत में विलंब को लेकर तर्क दिए। उन्होंने अदालत से कहा कि उनके मुवक्किल पिछले पांच वर्षों से हिरासत में हैं और उनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं। वकीलों का यह भी कहना था कि आरोपियों ने दंगे भड़काने का कोई ठोस सबूत नहीं दिया।

वहीं, दिल्ली पुलिस ने जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि आरोपितों की गतिविधियाँ जानबूझकर राज्य को अस्थिर करने की कोशिश थीं। पुलिस ने दावा किया कि यह sponteneous प्रदर्शन नहीं थे, बल्कि एक सुनियोजित “पैन-इंडिया” साजिश थी, जिसका उद्देश्य “सरकार बदलना” और “आर्थिक घेराबंदी” करना था। पुलिस ने यह भी कहा कि इस साजिश की योजना उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति के भारत दौरे के साथ मेल खाकर बनाई गई थी ताकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचा जा सके और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के मुद्दे को वैश्विक बनाया जा सके।

पुलिस ने कहा कि आरोपी कई व्हाट्सएप ग्रुप्स और दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप (DPSG) के माध्यम से हिंसा को संगठित कर रहे थे। उनके कथित “पूर्व नियोजित और जड़ वाली साजिश” के चलते 53 लोगों की मौत हुई और सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा।

दिल्ली हाई कोर्ट ने 2 सितंबर 2025 को शरजील इमाम, उमर खालिद और सात अन्य की जमानत याचिकाएं खारिज की थीं। हाई कोर्ट ने कहा था कि इमाम और खालिद का भूमिका “गंभीर” थी और उन्होंने धार्मिक आधार पर भड़काऊ भाषण देकर मुस्लिम समुदाय के लोगों को दंगों के लिए उकसाया।

2020 में पुलिस ने इमाम को मुख्य साजिशकर्ता के रूप में यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया था। उस समय दंगे नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध के दौरान हुए थे, जिनमें 53 लोग मारे गए और 700 से अधिक घायल हुए।सुप्रीम कोर्ट का आज का फैसला इस लंबित मामले में महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।