
अर्सला खान नई दिल्ली
रजब के चांद के दीदार के बाद अब मुसलमानों की निगाहें रमजान 2026 की तारीख पर टिकी हैं। धार्मिक जानकारों और खगोलीय गणनाओं के अनुसार, 2026 में रमजान कई सालों बाद सर्दियों के मौसम में आएगा, जिससे रोजेदारों को गर्मी के मुकाबले कहीं अधिक राहत मिलने की उम्मीद है।
चांद की मौजूदा स्थिति और इस्लामी महीनों की गणना के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि 2026 में रमजान का पहला रोजा शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को रखा जा सकता है।
हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि शाबान के चांद के दीदार के बाद ही होगी, लेकिन खगोलीय आंकड़े इसी तारीख की ओर इशारा कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है, तो भारत समेत कई देशों में रोजेदार फरवरी की ठंडी सुबहों में सहरी करेंगे और शाम को अपेक्षाकृत जल्दी इफ्तार का अवसर मिलेगा।

खास बात यह है कि करीब 16 साल बाद रमजान पूरी तरह सर्दियों के मौसम में लौट रहा है। इससे पहले 2009-2010 के आसपास रमजान सर्दियों में पड़ा था। इसके बाद हर साल इस्लामी कैलेंडर के अनुसार रमजान करीब 10–11 दिन पहले खिसकता रहा और बीते कई वर्षों से रोजेदारों को भीषण गर्मी और लंबे रोजों का सामना करना पड़ा। 2026 में यह स्थिति बदलने जा रही है।
मौसम की बात करें तो पहले रोजे के दिन उत्तर भारत में तापमान 10 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों में सुबह और रात के समय हल्की ठंड रहेगी, जबकि दिन में मौसम सुहावना बना रहेगा। दक्षिण भारत में तापमान थोड़ा अधिक हो सकता है, लेकिन वहां भी गर्मी असहनीय स्तर पर नहीं होगी। कुल मिलाकर, 2026 का रमजान मौसम के लिहाज से रोजेदारों के लिए काफी अनुकूल माना जा रहा है।

सर्दियों में रमजान होने से रोजों की अवधि भी अपेक्षाकृत कम होगी। फरवरी में दिन छोटे होने के कारण रोजा करीब 11 से 12 घंटे का रहने की संभावना है, जबकि गर्मियों में यह अवधि 15 से 16 घंटे तक पहुंच जाती है। इससे बुजुर्गों, महिलाओं और कामकाजी लोगों को विशेष राहत मिलने की उम्मीद है।
रजब के चांद के साथ ही मस्जिदों में इबादत का माहौल बनना शुरू हो गया है। कई जगहों पर नफ्ल रोजे, दुआओं और इबादतों का सिलसिला तेज हो गया है। उलेमा का कहना है कि रजब आत्ममंथन और तैयारी का महीना है, शाबान अभ्यास का और रमजान इबादत व सब्र का चरम बिंदु होता है।

कुल मिलाकर, 2026 का रमजान न सिर्फ सर्दियों की राहत लेकर आ रहा है, बल्कि लंबे समय बाद आसान और सुकून भरे रोजों की सौगात भी देने वाला है। अब सभी की निगाहें शाबान के चांद पर टिकी हैं, जिसके साथ ही रमजान की तारीख पर अंतिम मुहर लगेगी।