जन्मदिन विशेष: सुर, संवेदना और सिलिकॉन चिप्स, ए. आर. रहमान की AI पर नई परिभाषा

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  [email protected] | Date 07-01-2026
Birthday Special: Melody, Emotion, and Silicon Chips – A.R. Rahman's new definition of AI.
Birthday Special: Melody, Emotion, and Silicon Chips – A.R. Rahman's new definition of AI.

 

ओनिका माहेश्वरी | नई दिल्ली

आज विश्व संगीत के सबसे प्रभावशाली और प्रतिष्ठित नामों में शुमार, ऑस्कर विजेता संगीतकार और गायक ए. आर. रहमान का जन्मदिन है। यह अवसर केवल उनके असाधारण संगीत सफर को याद करने का नहीं, बल्कि उस दूरदर्शी सोच को समझने का भी है, जिसके तहत वे संगीत, तकनीक और मानव संवेदनाओं के बीच एक संतुलित सेतु बनाने का प्रयास कर रहे हैं। आज जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) रचनात्मक क्षेत्रों में तेज़ी से प्रवेश कर रही है, ए. आर. रहमान का दृष्टिकोण इसे लेकर नैतिक, रचनात्मक और जिम्मेदार उपयोग की एक मिसाल पेश करता है।

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6 जनवरी 1967 को चेन्नई में जन्मे ए. आर. रहमान का असली नाम ए. एस. दिलीप कुमार था। उनके पिता आर. के. शेखर स्वयं फिल्मी दुनिया के जाने-माने संगीतकार थे, लेकिन रहमान के बचपन में ही उनका निधन हो गया। कम उम्र में परिवार की जिम्मेदारियाँ उनके कंधों पर आ गईं। आर्थिक तंगी, मानसिक दबाव और जीवन की कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने संगीत से कभी समझौता नहीं किया। यही संघर्ष आगे चलकर उनके संगीत में गहराई, दर्द और आत्मा का रंग बनकर उभरा।

भारतीय फिल्म संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में ए. आर. रहमान की भूमिका ऐतिहासिक रही है। उन्होंने न केवल धुनों की भाषा बदली, बल्कि तकनीक, साउंड डिजाइन और वर्ल्ड म्यूज़िक को भारतीय संगीत में इस तरह पिरोया कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी गूंज उठा। “स्लमडॉग मिलियनेयर” के लिए दो ऑस्कर, दो ग्रैमी, एक बाफ्टा और एक गोल्डन ग्लोब जीतकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि भारतीय संगीतकार भी वैश्विक सिनेमा की धड़कन बन सकता है। इसके अलावा पद्म श्री, पद्म भूषण, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और दर्जनों फिल्मफेयर अवॉर्ड्स ने उन्हें एक ऐसे संगीत उस्ताद के रूप में स्थापित किया, जिन्हें दुनिया “मद्रास का मोजार्ट” कहकर सम्मान देती है।

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हाल के वर्षों में ए. आर. रहमान का नाम सिर्फ संगीत के लिए ही नहीं, बल्कि AI और संगीत के रिश्ते को लेकर भी चर्चा में रहा है। 2024 में फिल्म “लाल सलाम” के गीत “थिमिरी येझुदा” ने एक नई बहस को जन्म दिया, जब रहमान ने AI तकनीक के ज़रिए दिवंगत गायकों बांबा बाक्या और शाहुल हमीद की आवाज़ को पुनर्जीवित किया।

यह प्रयोग इसलिए खास माना गया क्योंकि इसमें नैतिकता को केंद्र में रखा गया, गायकों के परिवारों से पूर्व अनुमति ली गई, उन्हें उचित पारिश्रमिक दिया गया और आवाज़ को “व्यक्तित्व की संपत्ति” मानते हुए पूरा सम्मान दिया गया। रहमान ने साफ़ कहा कि AI का यह उपयोग श्रद्धांजलि और रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए था, न कि किसी कलाकार की जगह लेने के लिए।

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दरअसल, ए. आर. रहमान का मानना है कि AI न तो देवता है और न ही दानव, वह सिर्फ एक शक्तिशाली औज़ार है, जिसकी दिशा इंसान तय करता है। वे बार-बार यह कहते आए हैं कि AI का उद्देश्य इंसानी रचनात्मकता को बढ़ाना होना चाहिए, न कि उसे खत्म करना। गलत इस्तेमाल से नौकरियाँ खतरे में पड़ सकती हैं, लेकिन सही सोच और नीति के साथ AI नए कलाकारों के लिए अवसर, सीमित संसाधनों वाले युवाओं के लिए मंच और संगीत उद्योग में नई संभावनाएँ पैदा कर सकता है।

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इसी सोच का विस्तार है उनका महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट “Secret Mountain”। यह एक AI-पावर्ड वर्चुअल बैंड और मेटाह्यूमन कॉन्सेप्ट है, जिसका उद्देश्य विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और नई पीढ़ी के कलाकारों को एक साझा डिजिटल मंच पर लाना है। इस परियोजना के तहत रहमान ने OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन और Google Cloud जैसे तकनीकी दिग्गजों से भी संवाद किया है। उनका सपना है कि भारत AI-संचालित रचनात्मकता में वैश्विक नेतृत्व करे और तकनीक को कलात्मक सहयोग की शक्ति के रूप में इस्तेमाल किया जाए।

एआर रहमान

ए. आर. रहमान हमेशा नई तकनीकों को अपनाने में अग्रणी रहे हैं—चाहे वह डिजिटल ऑडियो वर्कस्टेशन हों, वर्चुअल इंस्ट्रूमेंट्स हों या AI आधारित टूल्स। वे युवाओं को प्रेरित करते हैं कि तकनीक से डरने के बजाय उसे समझें और रचनात्मकता के विस्तार के लिए इस्तेमाल करें। उनकी संगीत अकादमी और शैक्षणिक पहलें आज भी हजारों युवा कलाकारों को प्रशिक्षित कर रही हैं।

संगीत की बात करें तो रहमान की धुनों ने हर पीढ़ी को छुआ है। “छैय्या छैय्या”, “जया हो”, “कुन फाया कुन”, “मां तुझे सलाम”, “रहना तू”, “लुका छुपी”, “अगर तुम साथ हो” जैसे गीत सिर्फ हिट नहीं हुए, बल्कि लोगों की भावनाओं का हिस्सा बन गए। उनके संगीत में प्रेम, अध्यात्म, देशभक्ति और आधुनिकता का ऐसा संगम है, जो समय से परे महसूस होता है।

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ए. आर. रहमान सिर्फ एक संगीतकार नहीं, बल्कि एक विचार और एक आंदोलन हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि परंपरा और तकनीक एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि सही सोच और संवेदनशीलता के साथ एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं। उनके जन्मदिन पर यही कहा जा सकता है कि रहमान का संगीत सिर्फ सुना नहीं जाता, वह महसूस किया जाता है और आने वाले कल की दिशा तय करता है।