Jauhar University has been declared a 'public road' by the PWD.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग ने रामपुर में समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता आजम खान के मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय परिसर से गुजरने वाली मुख्य सड़क को सार्वजनिक सड़क घोषित कर दिया है और विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर ‘साइन बोर्ड’ लगा दिया है कि यह सड़क आम जनता के आवागमन के लिए खुली है।
यह तीन किलोमीटर लंबी, चार लेन वाली सीमेंट-कंक्रीट सड़क है, जिसका निर्माण अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में 2016-17 में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने लगभग 17.16 करोड़ रुपये की लागत से कराया था।
अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को बताया कि सड़क विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार से दूसरे छोर तक 450 एकड़ के परिसर से होकर गुजरती है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा 2019 में मुख्य द्वार बंद करने के बाद से प्रवेश प्रतिबंधित था, यहां तक कि पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को भी प्रवेश करने से रोक दिया गया था।
पीडब्ल्यूडी के कार्यकारी अभियंता किशन वीर सिंह ने कहा कि विभाग ने अब इस सड़क पर ‘‘आम रास्ता’’ दर्शाने वाले बोर्ड लगा दिए हैं, जिससे आम लोगों को इस मार्ग पर बिना किसी रोक-टोक के आने-जाने की अनुमति मिल गई है।
सिंह ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘विश्वविद्यालय द्वार से चार लेन की सीमेंट-कंक्रीट सड़क को पीडब्ल्यूडी द्वारा 2016 में लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई थी। इसमें करीब 13.5 करोड़ रुपये के सिविल निर्माण कार्य कराए गए, जबकि शेष राशि करों और अन्य मदों पर खर्च की गई।’’
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने 2019 में द्वार बंद कर दिया था, जिससे सड़क पर आवाजाही प्रतिबंधित हो गई, जिसके बाद विभाग ने नोटिस जारी किया। इसके बाद मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय तक पहुंच गया।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मामला खारिज होने के बाद, हमने निचली अदालत का दरवाजा खटखटाया जहां फैसला पीडब्ल्यूडी के पक्ष में गया। विश्वविद्यालय ने बाद में उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त किया। 2021-22 के बाद से, लगभग 10 से 12 सुनवाई सूचीबद्ध की गई हैं लेकिन कोई अंतिम सुनवाई नहीं हुई है।’’
अधिकारी के अनुसार, उच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय को सड़क को हुए नुकसान से संबंधित राशि का 30 प्रतिशत जमा करने का निर्देश दिया था। वहीं, विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार को यथावत रखा जाए या हटाया जाए, इस मुद्दे पर अदालत में अभी सुनवाई जारी है और अंतिम फैसला आना बाकी है।
सिंह ने कहा कि विभाग ने मामले को उच्च न्यायालय के समक्ष आगे बढ़ाने और शीघ्र निर्णय लेने के लिए एक कनिष्ठ अभियंता की प्रतिनियुक्ति की है।