the number of snakes and reptiles increases in Asola Bhati Sanctuary.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
दिल्ली में तापमान बढ़ने के साथ ही असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य में सांपों और अजगरों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई क्योंकि यह प्राणी इस अभयारण्य में अनुकूल वातावरण के कारण छोड़े गए हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से मई के बीच अभयारण्य में छोड़े गए कुल सरीसृपों में से 81 प्रतिशत को मार्च से मई के दौरान स्थानांतरित किया गया।
‘पीटीआई-भाषा’ को मिले आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से मई के बीच कुल 109 सांपों और अजगरों को अभयारण्य में छोड़ा गया। इनमें जनवरी में 13, फरवरी में आठ, मार्च में 26, अप्रैल में 32 और मई में 30 सांपों और अजगरों को छोड़ा गया।
आंकड़ों के मुताबिक, पांच महीने की अवधि में हुए कुल 109 पुनर्स्थापन (ट्रांसलोकेशन) में से 88 मामले मार्च, अप्रैल और मई में दर्ज किए गए।
स्थानांतरित किए गए सरीसृपों में इंडियन स्पेक्टेकल्ड कोबरा, वुल्फ स्नेक, रैट स्नेक, रॉयल स्नेक, कॉमन सैंड बोआ, चेकर्ड कीलबैक, कॉमन क्रेट, सॉ-स्केल्ड वाइपर और एक इंडियन रॉक पाइथन शामिल थे। इनमें सर्वाधिक 29 रैट स्नेक, 24 वुल्फ स्नेक और 19 इंडियन स्पेक्टेकल्ड कोबरा असोला लाए गए।
इसके अलावा 15 रॉयल स्नेक और 15 चेकर्ड कीलबैक, चार कॉमन सैंड बोआ, एक कॉमन क्रेट, दो सॉ-स्केल्ड वाइपर के तथा एक इंडियन रॉक पाइथन को भी इस अभयारण्य में लाया गया।
‘हाउस ऑफ स्ट्रे एनिमल्स’ के संस्थापक संजय महापात्र ने कहा कि गर्मियों के महीनों में सांपों के बचाव और पुनर्स्थापन के मामलों में वृद्धि सामान्य और वैज्ञानिक रूप से अपेक्षित है।
उन्होंने कहा, ‘‘सांप शीत-रक्तीय (एक्टोथर्मिक) जीव होते हैं। तापमान बढ़ने के साथ उनकी चयापचय दर और सक्रियता बढ़ जाती है। वे भोजन, पानी, आश्रय और अपेक्षाकृत ठंडे एवं सुरक्षित स्थानों की तलाश में अधिक बाहर निकलते हैं।’’
महापात्र ने बताया कि मार्च से मई का समय कई प्रजातियों के सांपों के प्रजनन काल का भी महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इस दौरान नर सांप साथी की तलाश में लंबी दूरी तय करते हैं, जिससे मनुष्य और सांपों के आमने-सामने आने तथा बचाव अभियानों की संभावना बढ़ जाती है।
आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल और मई में कई प्रजातियों के सांप अपेक्षाकृत अधिक संख्या में बचाव अभियानों के दौरान पकड़े गए।
महापात्र ने कहा कि कूड़ा स्थलों, खाद्य भंडारण क्षेत्रों, पशु शेड और अपशिष्ट निपटान स्थलों के आसपास चूहों जैसे खाद्य स्रोत मिलने के कारण सांप मानव आबादी वाले इलाकों की ओर भी आकर्षित होते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘वे अत्यधिक गर्मी से बचने के लिए झाड़ियों, घनी वनस्पति, नालों, निर्माण स्थलों और मलबे के ढेर जैसी ठंडी एवं छायादार जगहों में शरण लेते हैं।’’
आंकड़ों के अनुसार, बंदरों को छोड़कर अभयारण्य में छोड़े गए 61 अन्य जानवर स्तनधारी थे, जिनमें भारतीय खरगोशों की संख्या सबसे अधिक थी।
जनवरी से मई के बीच विभिन्न वन्यजीव बचाव एजेंसियों ने कुल 178 जानवरों को अभयारण्य में स्थानांतरित किया। इनमें 56 भारतीय खरगोश, दो सिवेट कैट, एक नेवला, एक साही, एक गोल्डन जैकाल, दो मोर और तीन बार्न आउल भी शामिल थे।