आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
बिहार के दरभंगा स्थित अधीनस्थ महाराजाधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय में संरक्षित हाथीदांत और काष्ठ निर्मित दुर्लभ पुरावशेषों एवं कलावस्तुओं के संरक्षण के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से हस्तक्षेप का अनुरोध किया गया है।
‘इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज’ (इनटैक) की बिहार इकाई ने प्रधानमंत्री से यह गुहार लगाई।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के पोर्टल पर दर्ज शिकायत में संग्रहालय के पूर्व संग्रहालयाध्यक्ष और बिहार की इनटैक इकाई के सह-संयोजक डॉ. शिव कुमार मिश्र ने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन लखनऊ स्थित राष्ट्रीय सांस्कृतिक संपदा संरक्षण अनुसंधान प्रयोगशाला (एनआरएलसी) के अधिकारियों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया।
उन्होंने शिकायत में कहा कि संरक्षण कार्य में देरी के कारण संग्रहालय की दुर्लभ कलावस्तुएं लगातार क्षतिग्रस्त हो रही हैं।
डॉ. मिश्र के अनुसार, दरभंगा के महाराजा रमेश्वर सिंह ने वर्ष 1900 से 1929 के बीच मुर्शिदाबाद के कलाकारों से हाथीदांत की अनेक कलावस्तुएं तैयार कराई थीं, जिनमें महिषासुरमर्दिनी की प्रतिमा, हाथी का हौदा, पालकी, पलंग, राजसिंहासन, घोड़े पर सवार छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा, सोफा, कुर्सियां, मेज, श्रृंगार बॉक्स, आभूषण बॉक्स, प्रसाधन सामग्री और दर्पण जैसी दुर्लभ वस्तुएं शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि संग्रहालय में काष्ठ निर्मित कलावस्तुओं का संग्रह भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिनमें भगवान बुद्ध के जन्म का दृश्य, मंदिरों की प्रतिकृतियां, सोफा, धातुयुक्त कुर्सियां, मेज, मगरमच्छ, मछली, कछुआ, ड्रेसिंग टेबल, डाइनिंग टेबल तथा दरबार हॉल की मेज जैसी कलाकृतियां शामिल हैं।
डॉ. मिश्र ने शिकायत में आरोप लगाया कि इन सभी दुर्लभ कलावस्तुओं को संग्रहालय के निर्माण और संरक्षण के उद्देश्य से राजपरिवार ने बिहार सरकार को दान दिया था।