जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने कहा, UCC पर फैसला संसद में होना चाहिए

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 16-09-2026
The Chief Minister of Jammu and Kashmir said that the decision on the UCC should be taken in Parliament.
The Chief Minister of Jammu and Kashmir said that the decision on the UCC should be taken in Parliament.

 

श्रीनगर

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने बीजेपी शासित राज्यों द्वारा समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में उठाए जा रहे कदम पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि यदि यह राष्ट्रीय महत्व का विषय है तो इसे अलग-अलग राज्यों में लागू करने के बजाय पहले संसद के स्तर पर उठाया जाना चाहिए।

श्रीनगर में मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में अब्दुल्ला ने कहा कि समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दे पर कानून संसद में लाया जाना चाहिए, न कि अलग-अलग राज्य अपने स्तर पर इसके लिए कानून बनाएं।

उन्होंने सवाल किया, “अगर आपके पास संख्या है तो इसे संसद में लाइए। अलग-अलग राज्यों में इसे अलग-अलग क्यों कर रहे हैं?”

अब्दुल्ला ने कहा कि यदि समान नागरिक संहिता केवल बीजेपी शासित राज्यों में लागू होती है तो उसे पूरे देश के लिए ‘समान’ या ‘यूनिफॉर्म’ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा, “पूरा देश बीजेपी शासित नहीं है। ऐसे कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं जहां बीजेपी की सरकार नहीं है।”

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर UCC को लेकर मतभेदों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गठबंधन में शामिल कुछ दल अपने राज्यों में UCC लागू करने के पक्ष में नहीं हैं।

उन्होंने कहा, “रिपोर्टों के मुताबिक जनता दल-यूनाइटेड ने सीधे तौर पर कहा है कि बिहार में इसे लागू नहीं किया जाएगा। अगर उनके अपने सहयोगी ही इसके लिए तैयार नहीं हैं तो वे इसे पूरे देश में लागू करने की बात कैसे कर सकते हैं?”

अब्दुल्ला ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दे पर फैसला किसी एक राज्य के स्तर पर नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक इस तरह के विषय पर पूरे देश के स्तर पर निर्णय लिया जाना चाहिए, क्योंकि देश का समग्र प्रतिनिधित्व संसद में होता है।

उन्होंने कहा, “इस तरह का फैसला अलग-अलग राज्यों द्वारा नहीं किया जाना चाहिए। इसका फैसला पूरे देश को करना है। पूरे देश का प्रतिनिधित्व राज्यों में नहीं, बल्कि संसद में होता है। कानून संसद में लाइए।”