देहरादून (उत्तराखंड)
सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) की दिल्ली बेंच के जस्टिस राजवीर सिंह वर्मा ने उत्तराखंड कैडर के IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। यह याचिका IFS अधिकारियों की अप्रेज़ल रिपोर्ट चैनल से जुड़े उत्तराखंड सरकार के नवंबर 2021 के आदेश को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी।
21 सितंबर को जारी अलग होने के आदेश में कहा गया, "कुछ समय तक मामले की सुनवाई के बाद, माननीय सदस्य (न्यायिक) श्री राजवीर सिंह वर्मा ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है।" आदेश में अलग होने का कोई खास कारण नहीं बताया गया।
चतुर्वेदी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इसके साथ ही उन जजों की संख्या 17 हो गई है जिन्होंने चतुर्वेदी से जुड़े मामलों की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। अब तक, सुप्रीम कोर्ट के दो जज, नैनीताल हाई कोर्ट के चार जज, CAT के नौ जज (जिनमें इसके चेयरमैन भी शामिल हैं) और ज़िला न्यायपालिका के दो जजों ने चतुर्वेदी से जुड़े मामलों से खुद को अलग कर लिया है। इससे पहले, नैनीताल हाई कोर्ट के जस्टिस आलोक वर्मा और जस्टिस रवींद्र मैठाणी ने चतुर्वेदी द्वारा CAT सदस्यों और रजिस्ट्री के खिलाफ दायर अवमानना मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। यह मामला हाई कोर्ट द्वारा पारित स्टे ऑर्डर का पालन न करने के आरोप से जुड़ा था।
फरवरी 2024 में, नैनीताल हाई कोर्ट के जस्टिस मनोज तिवारी ने चतुर्वेदी की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (डेप्युटेशन) के संबंध में कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) से दस्तावेज़ मंगाने से जुड़े मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। मई 2023 में, नैनीताल हाई कोर्ट के जस्टिस राकेश थपलियाल ने भी चतुर्वेदी के AIIMS, नई दिल्ली में मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) के कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार-रोधी जांच से संबंधित दस्तावेज़ मंगाने के मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।
इससे पहले, फरवरी 2025 में, जस्टिस हरविंदर ओबेरई और बी आनंद की CAT डिवीज़न बेंच ने बिना कोई कारण बताए चतुर्वेदी की अप्रेज़ल रिपोर्ट को डाउनग्रेड करने से जुड़े मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। अप्रैल 2025 में, एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) नेहा कुशवाहा ने CAT जज मनीष गर्ग के खिलाफ चतुर्वेदी द्वारा दायर मानहानि के मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उनके परिवार के एक अन्य CAT जज के साथ पहले से संबंध थे।
चतुर्वेदी से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट में भी जजों के खुद को अलग करने की घटनाएं हुई हैं। नवंबर 2013 में, तत्कालीन सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रंजन गोगोई ने हरियाणा में कथित भ्रष्टाचार के मामलों की CBI जांच की मांग करने वाली चतुर्वेदी की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। अगस्त 2016 में, तत्कालीन सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस यू. यू. ललित ने भी इस मामले से खुद को अलग कर लिया था।
अन्य उदाहरणों में मार्च 2019 में CAT चेयरमैन जस्टिस एल. नरसिम्हा रेड्डी, फरवरी 2021 में CAT जज जस्टिस आर. एन. सिंह, और नवंबर 2023 में CAT जज जस्टिस मनीष गर्ग और छबिलेन्द्र राउल का चतुर्वेदी से जुड़े मामलों से खुद को अलग करना शामिल है।
जनवरी 2025 में, CAT जज जस्टिस राजीव जोशी ने भी लोकपाल से संबंधित चतुर्वेदी के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (सेंट्रल डेप्युटेशन) मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।