Jairam Ramesh alleges cover up in Ayodhya temple offerings theft chargesheet, VHP says probe complete
नई दिल्ली
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में दायर चार्जशीट पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने मामले को दबाने का आरोप लगाया और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की। वहीं, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार का कहना है कि जांच पूरी हो चुकी है और चढ़ावे की चोरी के अलावा कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई है। X पर एक पोस्ट में रमेश ने कहा कि मंदिर में चढ़ावे की चोरी की जांच के लिए सरकार द्वारा बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) पर जनता को कभी भरोसा नहीं था, और चार्जशीट से सामने आई जानकारी ने शक को और गहरा कर दिया है।
उन्होंने कहा, "हमने पहले दिन से ही कहा था कि देश के लोगों को भगवान श्री राम के अयोध्या मंदिर में चढ़ावे की चोरी की जांच के लिए सरकार द्वारा बनाई गई SIT पर भरोसा नहीं है। अब, चार्जशीट से सामने आए तथ्यों ने इस जांच और सरकार की मामले को दबाने की कोशिशों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।" रमेश ने सबूत मिलने और FIR दर्ज होने के बीच काफी देरी का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, "चार्जशीट के अनुसार, 4 जून को बाथरूम में ₹2.25 लाख मिलने का एक वीडियो चंपत राय को भेजा गया था। 5 जून को उन्हें CCTV फुटेज भी दिखाया गया था। इसके बावजूद, FIR 25 जून को दर्ज की गई। जब CCTV फुटेज, बरामदगी और संदिग्ध कर्मचारियों की पहचान पहले ही सामने आ चुकी थी, तो आपराधिक कार्रवाई शुरू करने में इतनी देरी क्यों हुई? इन 21 दिनों में असल में किसे बचाने का मौका मिला और क्या छिपाया गया?" उन्होंने कथित चोरी के पैमाने के बारे में चार्जशीट से मिली जानकारी का भी हवाला दिया।
उन्होंने कहा, "चार्जशीट के अनुसार, CCTV फुटेज से पता चला है कि 105 बार चढ़ावा हटाया गया। एक आरोपी को 85 बार पैसे निकालते हुए देखा गया, और अन्य आरोपियों की बार-बार संलिप्तता भी सामने आई है।" रमेश ने सवाल उठाया कि ट्रस्ट के सीनियर अधिकारियों को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया। उन्होंने कहा, "SIT को पता था कि सब कुछ सामने आने के तीन दिन बाद भी चंपत राय ने चढ़ावे की चोरी से इनकार किया था। फिर भी, चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया - वे गवाह क्यों हैं? जनता का भरोसा खोने के बावजूद, वे अभी भी ट्रस्ट में क्यों बने हुए हैं?"
उन्होंने तर्क दिया कि इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री की जांच के बावजूद जांच का दायरा सीमित लग रहा था।
उन्होंने कहा, "70 से 105 घटनाएं सामने आई हैं, हजारों डिजिटल संदेशों की जांच की गई है, और बैंक खातों व संपत्तियों की जांच का भी जिक्र है। फिर भी, जांच का दायरा सिर्फ आठ आरोपियों तक ही क्यों सीमित रहा? क्या SIT ने पूरे सिस्टम की जवाबदेही तय की, या मामले को सिर्फ छोटे-मोटे लोगों तक ही सीमित रखा?" उन्होंने आगे कहा, "सबसे बड़ा सवाल: क्या इस पूरे मामले के तार BJP-RSS के शीर्ष नेतृत्व तक जुड़े हैं?" रमेश ने कोर्ट की निगरानी में नई जांच की मांग की।
उन्होंने कहा, "जब तक भगवान श्री राम के नाम पर चढ़ाए गए चढ़ावे की चोरी के लिए असली ज़िम्मेदारी तय नहीं हो जाती, तब तक इस मामले को बंद नहीं माना जा सकता... इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए।" उन्होंने प्रधानमंत्री से भी जवाब देने को कहा। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री जी, अपनी चुप्पी तोड़िए - वरना इसका मतलब है कि चोरों को आपका संरक्षण प्राप्त है।" इस मामले से जुड़े आरोपों के बारे में पूछे जाने पर VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और सुप्रीम कोर्ट ने इसकी बारीकी से निगरानी की है।
उन्होंने कहा, "अयोध्या राम मंदिर मामले की जांच पूरी हो चुकी है और कोर्ट में 17,000 से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने जांच की निगरानी की और SIT का पुनर्गठन किया गया, जिसमें एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया गया।"
कुमार ने कहा कि जांच में चढ़ावे की चोरी की पुष्टि तो हुई, लेकिन कोई अन्य अनियमितता नहीं पाई गई। उन्होंने कहा, "जांच में चढ़ावे की चोरी का पता चला है; आरोपियों को गिरफ़्तार कर लिया गया है और उन पर मुक़दमा चलेगा। चढ़ावे के अलावा कोई गड़बड़ी नहीं पाई गई और राम लला को चढ़ाई गई कीमती चीज़ें सुरक्षित हैं।" उन्होंने आगे कहा कि अब इस मामले को सुलझा हुआ माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि अब यह विवाद खत्म हो जाना चाहिए। जो लोग दोषी पाए गए हैं, उन पर मुक़दमा चलेगा।"