संरा सुरक्षा परिषद की सिर्फ अस्थायी श्रेणी का विस्तार हुआ तो नाकाम साबित होगा सुधार: भारत

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 16-06-2026
 temporary category of UN Security Council is expanded: India
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आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
भारत ने चेतावनी दी कि अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार केवल अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने तक ही सीमित रहा, तो यह अपने उद्देश्य में लगभग विफल माना जाएगा।
 
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने सोमवार को सुरक्षा परिषद सुधारों पर आयोजित अंतर-सरकारी वार्ता की बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही।
 
उन्होंने कहा, “अगर सुरक्षा परिषद का विस्तार केवल अस्थायी सदस्यता श्रेणी तक सीमित रहा तो यह सुधार न केवल अपर्याप्त होगा, बल्कि एक तरीके से विफल माना जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे पांच स्थायी सदस्यों के हाथों में केंद्रित निर्णय लेने की मौजूदा शक्ति-संरचना में कोई बुनियादी बदलाव नहीं आएगा।”
 
हरीश ने कहा, “समूहों व सदस्य देशों ने वास्तविक और सार्थक सुधारों के लिए इतना लंबा इंतजार किया है।”
 
वह बैठक को संबोधित कर रहे थे और उनका मुख्य विषय ‘एलिमेंट्स पेपर’ था। यह एक ऐसा दस्तावेज है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के शक्तिशाली निकाय में सुधार को लेकर सदस्य देशों की सहमति और असहमति वाले बिंदु शामिल हैं।
 
हरीश ने जोर देकर कहा कि स्थायी श्रेणी के विस्तार की वकालत कर भारत की लगातार कोशिश सुरक्षा परिषद में ‘बेहतर संतुलन और समानता’ लाने के साथ-साथ वीटो का अधिकार रखने वाले पांच स्थायी सदस्यों चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका के निर्णय लेने के तौर-तरीकों में बदलाव लाने की भी रही है।
 
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की वर्षों पुरानी मुहिम में भारत अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। भारत लगातार इस बात की वकालत करता आया है कि सुरक्षा परिषद का विस्तार उसकी स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में किया जाना चाहिए।
 
भारत की दलील है कि वर्ष 1945 में स्थापित 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद 21वीं सदी की चुनौतियों और आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है तथा यह वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक वास्तविकताओं का सही प्रतिनिधित्व भी नहीं करती।
 
नयी दिल्ली ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि भारत सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का पूर्णतः हकदार है।
 
भारत आखिरी बार वर्ष 2021-22 में सुरक्षा परिषद की उच्च-स्तरीय निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा अस्थायी सदस्य के रूप में रहा था।
 
भारत ने चर्चा के लिए प्रस्तुत किए गए ‘एलिमेंट्स पेपर’ की भी आलोचना की।