Tata Steel gets interim relief in Rs 1,755-crore Jharkhand coal mining demand case
नई दिल्ली
झारखंड सरकार की ओर से 1,755 करोड़ रुपये की मांग को लेकर चल रहे विवाद में टाटा स्टील को अंतरिम राहत मिली है। कोयला मंत्रालय के तहत आने वाले रिविजनल अथॉरिटी (पुनरीक्षण प्राधिकरण) ने राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जब तक इस मांग के खिलाफ कंपनी की चुनौती पर विचार चल रहा है, तब तक वे कंपनी के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई न करें। मंगलवार को एक्सचेंज फाइलिंग में टाटा स्टील ने बताया कि रिविजनल अथॉरिटी ने मांग को चुनौती देने वाली उसकी पुनरीक्षण याचिका (revision application) को भी विचार के लिए स्वीकार कर लिया है।
यह मामला वित्त वर्ष 2000-01 से 2006-07 के दौरान झारखंड में टाटा स्टील की वेस्ट बोकारो कोलियरी से कोयले के कथित तौर पर तय सीमा से ज़्यादा खनन से जुड़ा है। रामगढ़ के ज़िला खनन कार्यालय (DMO) ने 30 मार्च, 2026 को एक डिमांड नोटिस जारी कर कंपनी से कुल 1,755.10 करोड़ रुपये की मांग की थी। टाटा स्टील को यह नोटिस 3 अप्रैल को मिला था। फाइलिंग के अनुसार, DMO का आरोप है कि टाटा स्टील ने सात साल की अवधि के दौरान वेस्ट बोकारो कोलियरी में तय सीमा से ज़्यादा, लगभग 1.62 करोड़ मीट्रिक टन कोयले का खनन किया था। यह मांग उन्हीं आधारों पर की गई थी जिनका ज़िक्र सुप्रीम कोर्ट ने 'कॉमन कॉज़ बनाम भारत संघ' मामले में किया था। हालांकि, टाटा स्टील ने इस मांग का विरोध किया और कहा कि इसमें "कोई औचित्य और ठोस आधार नहीं है"।
इसके बाद कंपनी ने 24 अप्रैल को कोयला मंत्रालय के रिविजनल अथॉरिटी के सामने डिमांड नोटिस को चुनौती देते हुए पुनरीक्षण याचिका दायर की। इस कार्यवाही में झारखंड राज्य (खान और भूविज्ञान विभाग के सचिव और ज़िला खनन अधिकारी, रामगढ़ के माध्यम से) प्रतिवादी हैं। रिविजनल अथॉरिटी ने 20 अगस्त को टाटा स्टील की याचिका पर सुनवाई की और कंपनी को 24 अगस्त को आदेश की कॉपी मिली। कंपनी ने आदेश का हवाला देते हुए कहा, "टाटा स्टील लिमिटेड ('आवेदक') द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका को विचार के लिए स्वीकार कर लिया गया है।"
इसमें आगे कहा गया है कि प्रतिवादियों को निर्देश दिया गया है कि "मौजूदा पुनरीक्षण याचिका पर विचार चलने के दौरान, विवादित डिमांड नोटिस/पत्रों के आधार पर आवेदक के खिलाफ कोई सख्त कदम न उठाएं।" इस आदेश से टाटा स्टील को फिलहाल प्रवर्तन कार्रवाई (enforcement action) से सुरक्षा मिली है, लेकिन 1,755 करोड़ रुपये की मांग को रद्द नहीं किया गया है। जब तक रिविज़नल अथॉरिटी कंपनी की चुनौती पर कोई फ़ैसला नहीं ले लेती, तब तक मूल विवाद उसके पास ही रहेगा। इसलिए, यह ताज़ा आदेश मामले में कोई अंतिम फ़ैसला नहीं, बल्कि एक अंतरिम घटनाक्रम है।