Supreme Court refuses TMC plea against frozen accounts, sends matter back to HC for expeditious hearing
नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) को उन चार बैंक अकाउंट्स को ऑपरेट करने की इजाज़त देने से इनकार कर दिया, जिन्हें पश्चिम बंगाल पुलिस ने साइबर क्राइम की शिकायत के सिलसिले में फ्रीज़ कर दिया था। जस्टिस एमएम सुंदरेश और पीबी वराले की बेंच TMC गुट की ओर से अपने अकाउंट्स को फ्रीज़ किए जाने के खिलाफ दायर एक नई याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह शिकायत TMC विधायक विश्वनाथ दास ने दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि गैर-कानूनी गतिविधियों और बेईमानी भरे वित्तीय लेन-देन से मिले फंड को कुछ खास अकाउंट्स में भेजा गया था।
TMC की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने पुलिस की कार्रवाई के आधार पर सवाल उठाए और कहा कि पार्टी यह दावा नहीं कर रही है कि उसके पास फंड नहीं है, बल्कि यह कह रही है कि वह अकाउंट्स को ऑपरेट नहीं कर पा रही है। उन्होंने तर्क दिया कि भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने पार्टी का चुनाव चिह्न फ्रीज़ करने के अपने हालिया निर्देश में पार्टी के फंड के बारे में कोई फैसला नहीं लिया था। डॉ. सिंघवी ने कहा, "ECI फंड के बारे में कुछ नहीं कहता है।"
सिंघवी ने यह भी कहा कि हालांकि पुलिस मनी लॉन्ड्रिंग और फंड की हेराफेरी की बात कर रही है, लेकिन उन्होंने अकाउंट्स को फ्रीज़ करने का आधार नहीं बताया है। डॉ. सिंघवी ने तर्क दिया, "वे मनी लॉन्ड्रिंग और हेराफेरी की बात करते हैं लेकिन फंड के बारे में कुछ नहीं... सभी पूर्वाग्रहपूर्ण बयान, भारी मात्रा में कैश वगैरह।" उन्होंने आगे तर्क दिया कि पुलिस ने इस कार्रवाई का कोई कारण नहीं बताया है। पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने बताया कि पार्टी के एक पदाधिकारी, जो इसके जनरल सेक्रेटरी सुमित रॉय भी हैं, ने पार्टी अकाउंट में 34 करोड़ रुपये कैश जमा किए थे।
भारत के सॉलिसिटर जनरल (SGI) ने सुमित रॉय का ज़िक्र किया, जिन्होंने सरकारी ज़मीन को निजी नामों पर इस्तेमाल करने और बाद में उसे बेचने के आरोपों के बाद अग्रिम ज़मानत मांगी थी। रॉय को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली थी। कोर्ट ने कहा कि फंड को ऑपरेट करने का हकदार कौन है, इससे जुड़ा बड़ा मुद्दा TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा है।
कोर्ट ने कहा कि इस चरण में कोई भी निष्कर्ष निकालने से लंबित कार्यवाही पर काफी असर पड़ सकता है। आखिरकार कोर्ट ने हाई कोर्ट की कार्यवाही में दखल देने से इनकार कर दिया और याचिका का निपटारा करते हुए हाई कोर्ट से सुनवाई में तेज़ी लाने का अनुरोध किया।