Supreme Court agrees to hear plea of Wildlife SOS official in leopard poaching case
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को उस याचिका को सूचीबद्ध करने पर सहमति दे दी, जिसमें तेंदुए के कथित शिकार के मामले में 'वाइल्डलाइफ एसओएस' के सह संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्तिक सत्यनारायण को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा वापस लेने के मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई है।
सत्यनारायण की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की खंडपीठ से याचिका पर तुरंत सुनवाई करने की अपील की।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इसे सूचीबद्ध किया जायेगा।’’
यह मामला तेंदुओं के कथित शिकार की मध्यप्रदेश राज्य बाघ कार्यबल (एसटीएसएफ) द्वारा जांच से जुड़ा है। इन तेंदुओं की खालें उत्तर प्रदेश के आगरा में बरामद हुई थीं।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ ने हाल में वन्यजीव (सुरक्षा) अधिनियम, 1972 के तहत दायर की गयी दो याचिकाओं को खारिज कर दिया था और सत्यनारायण को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा को वापस ले लिया था। उच्च न्यायालय ने उन्हें 21 सितंबर को एसटीएसएफ के सामने पेश होने का भी निर्देश दिया था।
एक खबर के मुताबिक, मध्यप्रदेश वन विभाग ने आरोप लगाया था कि सत्यनारायण ने अपने खिलाफ जारी तीसरा समन और गिरफ्तारी वारंट छिपाया था। इसके बाद उच्च न्यायालय ने उन्हें दी गई सुरक्षा वापस ले ली।