हिरासत आदेशों के खिलाफ अर्जियों के जल्द निपटारे के लिए प्रभावी तंत्र बनाएं: केरल उच्च न्यायालय

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 16-07-2026
speedy disposal of petitions against detention orders: Kerala High Court
speedy disposal of petitions against detention orders: Kerala High Court

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
केरल उच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों से कहा है कि वे ऐसा प्रभावी तंत्र विकसित करें, जिससे हिरासत में लिए गए व्यक्तियों द्वारा अपनी एहतियातन हिरासत के आदेश के खिलाफ दी गई आपत्तियों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित हो सके।
 
मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. की खंडपीठ ने कहा कि किसी व्यक्ति का आपराधिक मामलों में आरोपी होना उसके संवैधानिक अधिकारों और सुरक्षा उपायों को न तो कम कर सकता है और न ही समाप्त कर सकता है।
 
पीठ ने कहा, ‘‘संविधान द्वारा निर्धारित प्रावधानों का पूरी निष्ठा और सावधानी के साथ पालन किया जाना चाहिए। इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और न ही इन्हें केवल औपचारिकता बनाकर निष्प्रभावी किया जा सकता है।’’
 
अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए स्वापक औषधि एवं मन: प्रभावी पदार्थ तस्करी रोधी अधिनियम (पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट) के तहत एक व्यक्ति के खिलाफ जारी हिरासत आदेश को रद्द कर दिया।
 
उच्च न्यायालय ने पाया कि संबंधित व्यक्ति द्वारा अपनी एहतियातन हिरासत के खिलाफ दी गई आपत्ति के निस्तारण में चार महीने से अधिक की देरी हुई थी। इसी आधार पर अदालत ने हिरासत के आदेश को निरस्त कर दिया।
 
गौरतलब है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22(5) के तहत किसी भी एहतियातन हिरासत में लिए गए व्यक्ति को अपनी हिरासत के आदेश के खिलाफ सरकार के समक्ष अभ्यावेदन देने का अधिकार प्राप्त है।