SP had claimed voter list rigging all along; strict action should be taken against officials: Dimple Yadav on SIR row
मैनपुरी (उत्तर प्रदेश)
समाजवादी पार्टी (SP) की सांसद डिंपल यादव ने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों को लेकर चिंता जताती रही है और कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रोसेस के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसमें कहा गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने SIR प्रोसेस में गड़बड़ियों पर आपत्ति जताई थी, डिंपल यादव ने शुक्रवार को कहा, "समाजवादी पार्टी शुरू से ही यह दावा करती रही है कि वोटर लिस्ट में धांधली हुई है और वोट हटाए जा रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि 2022 के चुनावों के दौरान, चुनाव आयोग ने SP के राष्ट्रीय अध्यक्ष को वोटर से जुड़ी शिकायतों के बारे में हलफ़नामा (affidavit) जमा करने के लिए नोटिस जारी किया था। उन्होंने कहा, "इसके बाद पार्टी ने लगभग 4,000 वोटरों के लिए हलफ़नामे जमा किए। हालाँकि, चुनाव आयोग की ओर से ईमेल के ज़रिए कोई जवाब नहीं मिला।" डिंपल यादव ने कहा कि इस प्रोसेस में शामिल अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, "यह माना जाना चाहिए कि मुख्य चुनाव आयुक्त सहित चुनाव आयोग की इसके लिए ज़िम्मेदारी है, और उन अधिकारियों की भी जिन्होंने पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया। उन सभी के ख़िलाफ़ सख़्त से सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए।" उनकी यह टिप्पणी SIR प्रक्रिया को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच आई है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में SIR प्रक्रिया से जुड़े फ़ैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी।
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD), शिवसेना (UBT) और वामपंथी दलों सहित विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर हमला बोला है। उन्होंने चुनावी पारदर्शिता को लेकर चिंता जताई है और जवाबदेही की मांग की है।
चुनाव आयोग के कामकाज और SIR प्रक्रिया को संभालने के तरीक़े के ख़िलाफ़ पार्टी के देशव्यापी कार्यक्रम के तहत, गुरुवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जम्मू-कश्मीर, असम, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर सहित कई राज्यों में प्रदर्शन किए। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि इस मामले में सबूत हैं और इसे सिर्फ़ राजनीतिक आरोप कहकर ख़ारिज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "तथ्य और सबूत मौजूद हैं। पूरा देश इन्हें देख सकता है। मेरे भाई ने कई प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन्हें दिखाया है। उन्होंने सबूत सबके सामने रखे हैं। अब यह बिल्कुल साफ़ है कि 13 करोड़ वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं।"
SP प्रमुख अखिलेश यादव ने भी चुनाव आयोग के अंदर मतभेदों की खबरों पर जवाबदेही की मांग की और कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद छोड़ देना चाहिए। अखिलेश यादव ने कहा, "जिन लोगों ने चुनाव आयोग में ये मतभेद पैदा किए, उन्हें खुद ही इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। पूरा विपक्ष और लोकतंत्र को बचाने की चाहत रखने वाले सभी लोग मांग कर रहे हैं कि जब ऐसे आरोप लगे हैं, तो CEC को खुद इस्तीफ़ा देकर हट जाना चाहिए। उन्होंने चुनाव छीन लिया।"
पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने चुनाव आयोग (ECI) के इस दावे पर सवाल उठाए कि सभी फ़ैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे, और मांग की कि संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं। उन्होंने कहा, "हमारा आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त BJP के लिए काम कर रहे हैं। वह BJP का प्रतिनिधित्व करते हैं। अगर चुनाव आयोग ने बयान दिया है कि सभी फ़ैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे, तो फ़ाइलें सार्वजनिक करें।"
वहीं, BJP ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें चुनावी हार से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर चुनाव आयोग पक्षपाती होता, तो विपक्ष केरल जैसे राज्यों में चुनाव नहीं जीत पाता।
हालांकि, केंद्रीय मंत्री और NDA के अहम सहयोगी चिराग पासवान ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग को आरोपों पर अपना पक्ष मज़बूती से रखना चाहिए।
पासवान ने कहा, "अगर चुनाव आयोग पर ऐसे सवाल उठाए जा रहे हैं, तो मेरा मानना है कि चुनाव आयोग, और खासकर CEC की भी यह ज़िम्मेदारी है कि वे अपना पक्ष मज़बूती से रखें।" इस बीच, चुनाव आयोग का कहना है कि आंतरिक तकनीकी नोट और लिखित सवाल कई सदस्यों वाली संस्था के सामान्य कामकाज का हिस्सा हैं। आयोग ने ज़ोर देकर कहा कि SIR प्रक्रिया से जुड़े सभी अंतिम फ़ैसले कानूनी मंज़ूरी के साथ सर्वसम्मति से लिए गए थे। ECI ने कहा कि आयोग द्वारा लिए गए सभी अंतिम फ़ैसले—जिनमें SIR प्रक्रिया से जुड़े फ़ैसले भी शामिल हैं—सर्वसम्मति से लिए गए थे और उन्हें तीनों आयुक्तों की मंज़ूरी हासिल थी।