SkyStriker loitering munition executes precision strike during India-US Yudh Abhyas 2026
नई दिल्ली
भारतीय सेना ने शनिवार को बताया कि 'युद्ध अभ्यास 2026' के दौरान महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में 'स्काईस्ट्राइकर' (SkyStriker) लोइटरिंग म्यूनिशन ने सटीक हमला (precision strike) सफलतापूर्वक किया। सेना द्वारा X पर शेयर किए गए एक वीडियो में, इस लोइटरिंग म्यूनिशन को असल जैसे ऑपरेशनल माहौल में तय लक्ष्यों का पता लगाते, उन पर कार्रवाई करते और सटीक निशाना लगाते हुए देखा गया। सेना ने कहा कि इस कार्रवाई ने आधुनिक युद्ध में स्वदेशी रक्षा तकनीक, सटीक हमले की क्षमता और बिना पायलट वाले सिस्टम (unmanned systems) की बढ़ती भूमिका को दिखाया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस अभ्यास का मकसद पहाड़ी और कम पहाड़ी इलाकों में 'इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स' (Integrated Battle Groups) के इस्तेमाल के लिए दोनों सेनाओं की संयुक्त सैन्य क्षमता को बढ़ाना है, जिसमें पैदल सेना (infantry) वाले ऑपरेशन्स पर खास ज़ोर दिया गया है।
इससे आपसी तालमेल (interoperability) बेहतर होगा, ऑपरेशन से जुड़े बेहतरीन तरीकों का आदान-प्रदान आसान होगा और संयुक्त योजना बनाने व उसे लागू करने की क्षमता मज़बूत होगी। तकनीक को शामिल करना इस अभ्यास का एक मुख्य फोकस है। ट्रेनिंग में निगरानी और टोह लेने (reconnaissance) के लिए ड्रोन और ऑटोनॉमस सिस्टम का इस्तेमाल, साथ ही आधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन भी शामिल है। सेना ने कहा कि यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब सेनाएं ड्रोन-युक्त युद्धक्षेत्रों और लगातार जटिल होते मल्टी-डोमेन काइनेटिक ऑपरेशन्स के हिसाब से खुद को ढाल रही हैं।
यह अभ्यास दोनों सेनाओं को रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं को साझा करने और अलग-अलग इलाकों व ऑपरेशनल माहौल में मिलकर सैन्य ऑपरेशन करने की अपनी क्षमता को बढ़ाने का मौका देता है। इससे पहले, गुरुवार को अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और 10 कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल विक्रांत सुरेश देशपांडे ने 'युद्ध अभ्यास 2026' के दौरान महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय और अमेरिकी सेना के जवानों द्वारा किए गए संयुक्त फायरिंग प्रदर्शन को देखा। इससे इस द्विपक्षीय ट्रेनिंग के बड़े पैमाने और आधुनिकता का पता चला।
इस प्रदर्शन में पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर, M777 अल्ट्रा-लाइट होवित्ज़र और धनुष आर्टिलरी सिस्टम के साथ-साथ AH-64E अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर, L70 एयर-डिफेंस गन और स्वाति वेपन-लोकेटिंग रडार शामिल थे। अमेरिकी सेना ने HIMARS और M-LIDS को मैदान में उतारा, जिससे मुश्किल फील्ड माहौल में आर्टिलरी, एविएशन, एयर-डिफेंस और निगरानी की अलग-अलग क्षमताएं एक साथ आईं। इस जॉइंट ट्रेनिंग से दोनों सेनाओं की मिलकर जटिल गतिविधियों की योजना बनाने, तालमेल बिठाने और उन्हें अंजाम देने की क्षमता का पता चला। साथ ही, इससे आपसी तालमेल, पेशेवर भरोसा और एक-दूसरे पर विश्वास भी बढ़ा। इतने बड़े स्तर पर नियमित ट्रेनिंग से एक-दूसरे के सिस्टम, प्रक्रियाओं और रणनीतिक तरीकों के बारे में समझ भी गहरी होती है।
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने X पर अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा, "महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में अमेरिकी और भारतीय सेनाओं को एक साथ ट्रेनिंग करते देखना शानदार है। यह अभ्यास हमारी रक्षा साझेदारी, भरोसे, तैयारी, आपसी तालमेल और साझा मकसद की मजबूती को दिखाता है। @USArmy और @adgpi जो कुछ भी मिलकर हासिल कर रहे हैं, उस पर गर्व है।" साइट पर पहुँचने के बाद, गोर ने X पर यह भी पोस्ट किया, "अभी 'युद्ध अभ्यास 2026' के लिए राजस्थान में महाजन फील्ड फायरिंग रेंज पहुँचा हूँ। यह भारत का किसी भी देश के साथ सबसे बड़ा द्विपक्षीय रक्षा अभ्यास है। अमेरिकी सेना और भारतीय सैनिकों को एक साथ ट्रेनिंग करते देखने का बेसब्री से इंतज़ार है।"