President of Uyghur Center for Democracy alleges continued detention, forced labour of Uyghurs in China
जिनेवा [स्विट्जरलैंड]
जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र के दौरान, 'उइघुर सेंटर फॉर डेमोक्रेसी' के अध्यक्ष डोलकुन ईसा ने उइघुर लोगों के प्रति चीन की नीतियों पर चिंता जताई। जिनेवा में बोलते हुए ईसा ने कहा कि उइघुर लोगों के प्रति चीन की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है, लेकिन बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच सरकार ने अपने तौर-तरीके बदल लिए हैं। उन्होंने बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव की ओर इशारा किया, जिसमें उइघुर लोगों पर UN की रिपोर्ट, उइघुर ट्रिब्यूनल का फैसला और मोज़ाम्बिक संसद द्वारा कथित उइघुर नरसंहार पर प्रस्ताव को मान्यता देना शामिल है।
उन्होंने कहा, "उइघुर लोगों पर UN की रिपोर्ट, उइघुर ट्रिब्यूनल के फैसले और मोज़ाम्बिक संसद द्वारा उइघुर नरसंहार पर प्रस्ताव को मान्यता देने से अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भी इसे कवर किया है।" ईसा ने कहा, "इसलिए, चीन सच्चाई को छिपाए नहीं रख सकता। चीनी सरकार अब अपनी रणनीति और तौर-तरीकों में थोड़ा बदलाव करके उस चीज़ को छिपाने और उस पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है जिसे मैं जारी उइघुर नरसंहार कहता हूँ।"
2017 से लागू प्रतिबंधों का ज़िक्र करते हुए ईसा ने कहा कि उइघुर लोगों और बाहरी दुनिया के बीच बातचीत पर बहुत ज़्यादा रोक लगा दी गई थी। उन्होंने कहा, "2017 से चीन ने सभी तरह के संपर्क काट दिए हैं। उसने उरुमकी और अन्य देशों के बीच सभी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दीं, इंटरनेट सेवा बंद कर दी और उइघुर लोगों के पासपोर्ट ज़ब्त कर लिए। कोई भी यात्रा नहीं कर सकता था।" ईसा ने कहा कि बाद में चीनी सरकार ने लोगों को उस इलाके में जाने की इजाज़त देकर अपना नज़रिया बदला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विदेशी पत्रकारों, राजनयिकों और विद्वानों के लिए ऐसे दौरे आयोजित किए जिन्हें उन्होंने 'प्रचार दौरे' (propaganda tours) बताया।
ईसा ने कहा, "चीनी सरकार ने पत्रकारों, राजनयिकों और तथाकथित विद्वानों को बुलाकर प्रचार दौरे आयोजित किए। उन्होंने बिज़नेस-क्लास उड़ानों, फाइव-स्टार होटलों और बाकी सभी चीज़ों का खर्च उठाया और हर चीज़ का बहुत सावधानी से इंतज़ाम किया।" उन्होंने कहा कि ऐसे दौरों का मकसद यह दिखाना था कि इलाके में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं।
ईसा ने आगे आरोप लगाया कि उइघुर लोगों को अब भी हिरासत में लिए जाने और ज़बरदस्ती काम कराए जाने का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “लाखों लोग अभी भी नज़रबंदी कैंपों में तकलीफ़ झेल रहे हैं। ज़बरदस्ती काम करवाना अभी भी एक गंभीर मुद्दा है। कैंपों के अंदर और बाहर, दोनों जगहों पर लोगों से ज़बरदस्ती काम करवाया जा रहा है।” ईसा ने आगे कहा, “दस लाख से ज़्यादा उइगर बच्चे भी अभी भी अपने परिवारों से अलग-थलग हैं।” चीन के 'एथनिक यूनिटी लॉ' (जातीय एकता कानून) का ज़िक्र करते हुए ईसा ने कहा, “हाल ही में, 1 जुलाई को चीन का 'एथनिक यूनिटी लॉ' लागू हुआ है। इसलिए, यह स्थिति बहुत खतरनाक है।” उन्होंने उइगर और तिब्बती भाषाओं की स्थिति पर भी चिंता जताई और कहा, “आज, उइगर और तिब्बती भाषाओं को रोज़मर्रा की ज़िंदगी और स्कूलों से, हर स्तर पर पूरी तरह से खत्म किया जा रहा है।”
ईसा ने कहा कि इस इलाके में आने वाले लोगों को शायद स्थिति तुरंत दिखाई न दे, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि उइगरों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा, “अगर आप बस वहाँ जाते हैं, तो शायद आपको यह साफ़ तौर पर दिखाई न दे। लेकिन असल में, हाल के दिनों में दबाव और बढ़ा है।”