सोमनाथ करोड़ों भारतीय बच्चों के अटूट साहस की मिसाल है : पीएम मोदी

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 05-01-2026
Somnath is an example of the unwavering courage of millions of Indian children: PM Modi
Somnath is an example of the unwavering courage of millions of Indian children: PM Modi

 

नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोमनाथ मंदिर के विनाश और पुनर्निर्माण की कहानी पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि “सोमनाथ” शब्द सुनते ही हर भारतीय के हृदय में गर्व और श्रद्धा जागती है। पीएम ने ब्लॉग पोस्ट में लिखा कि इस मंदिर का इतिहास केवल विनाश से नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीय बच्चों के अटूट साहस और दृढ़ निश्चय से परिभाषित होता है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि सोमनाथ मंदिर का पहला विनाश 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी के आक्रमण से हुआ। इसके बाद कई शताब्दियों तक मंदिर पर बार-बार हमले हुए, लेकिन यह हमेशा अपनी भव्यता और गौरव के साथ खड़ा रहा। 1947 में सद्रर वल्लभभाई पटेल ने मंदिर के पुनर्निर्माण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई, और के. एम. मुनशी ने उनका समर्थन किया। 11 मई 1951 को मंदिर का उद्घाटन हुआ, जिसमें राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद उपस्थित रहे।

पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर की अडिगता और पुनर्निर्माण भारतीय सभ्यता की शक्ति और निरंतरता का प्रतीक है। उन्होंने लिखा, “पुराने आक्रांताओं के नाम केवल इतिहास में धूल बन चुके हैं, जबकि सोमनाथ उज्ज्वल खड़ा है, जो हमें सिखाता है कि नफरत और कट्टरता केवल अस्थायी विनाश कर सकती है, लेकिन श्रद्धा और अच्छाई की शक्ति हमेशा स्थायी निर्माण कर सकती है।”

मुनशी के अनुसार, महमूद के आक्रमण में करीब 50,000 रक्षक शहीद हुए, मंदिर लूट लिया गया और लिंग तोड़ा गया। इसके बाद भी मंदिर बार-बार पुनर्निर्मित हुआ, अलाउद्दीन खिलजी, मुज़फ्फर खान, महमूद बेगड़ा और औरंगजेब के हमलों के बावजूद यह हिन्दू श्रद्धास्थान बना रहा। स्वामी विवेकानंद ने भी 1890 के दशक में सोमनाथ का दौरा किया और इसे जीवित ज्ञान का स्रोत बताया।

पीएम मोदी ने लिखा कि अगर सोमनाथ, जिसे हजार साल पहले और उसके बाद लगातार हमलों का सामना करना पड़ा, बार-बार पुनर्जीवित हो सकता है, तो भारत भी अपनी प्राचीन महिमा को पुनः स्थापित कर सकता है। उन्होंने समापन में कहा, “श्री सोमनाथ महादेव के आशीर्वाद से हम एक विकसित भारत के निर्माण की ओर बढ़ रहे हैं, जहां हमारी सभ्यता की बुद्धिमत्ता पूरे विश्व के कल्याण के लिए मार्गदर्शन करेगी।”