धर्मनिरपेक्ष के ठेकेदारों का बांग्लादेश की घटना पर मुंह बंद है: योगी आदित्यनाथ

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 10-01-2026
Secular contractors are silent on the Bangladesh incident: Yogi Adityanath
Secular contractors are silent on the Bangladesh incident: Yogi Adityanath

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
]मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धर्मनिरपेक्षता के नाम पर राजनीति करने वालों पर निशाना साधते हुए शनिवार को कहा कि बांग्लादेश की घटनाओं पर इनके मुंह बंद हैं।
 
मुख्यमंत्री यहां माघ मेला क्षेत्र में जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी महाराज के 726वें प्राकट्य उत्सव को संबोधित कर रहे थे।
 
संत समाज के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह पूरे समाज को जोड़ने का कार्य करता है और जब संत समाज एक मंच पर आकर उद्घोष करता है तो उसका परिणाम भी सामने आता है।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण इसका उदाहरण है, जो पूज्य संतों की साधना और एकता से ही हुआ और जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मूर्त रूप दिया।
 
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘देश की आजादी के बाद कई प्रधानमंत्री हुए और सभी ने देश के विकास के बारे में सोचा, लेकिन भारत की मूल आत्मा को सम्मान मिलना चाहिए और अयोध्या में रामलला विराजमान हों, यह भाव केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भीतर था, जिन्होंने इसे साकार किया।’’
 
योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो राम मंदिर में दर्शन करने गए, राम मंदिर के शिलान्यास में शामिल हुए, प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में भी उपस्थित रहे और मंदिर निर्माण पूर्ण होने के बाद शुभ मुहूर्त में सनातन धर्म की ध्वज-पताका के आरोहण में भी भागीदार बने।’’
 
धर्मनिरपेक्षता के नाम पर राजनीति करने वालों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “इन लोगों का बांग्लादेश की घटना पर मुंह बंद है। इनके मुंह से एक भी शब्द नहीं निकल रहा है। ऐसा लगता है कि किसी ने इनके मुंह पर फेवीकोल चिपका दिया है।
 
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे लोगों द्वारा बांग्लादेश की घटनाओं को लेकर कोई कैंडल मार्च नहीं निकाला जा रहा है। यह हम सबके लिए एक चेतावनी भी है।”
 
गंगा की निर्मलता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि त्रिवेणी में स्नान की दिव्य अनुभूति हो रही है।
 
उन्होंने कहा, “मैंने भी यहां आकर सबसे पहले त्रिवेणी में डुबकी लगाकर मां गंगा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। कितना पावन जल है। आज से आठ-दस वर्ष पहले क्या इतना निर्मल जल उपलब्ध हो पाता था?”