दुर्लभ कठपुतली कला ‘नोक्कुविद्या पावक्कली’ की प्रख्यात कलाकार मूझिक्कल पंकजाक्षी का निधन

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 15-07-2026
Renowned artist of the rare puppet art 'Nokkuvidya Paavakkali'
Renowned artist of the rare puppet art 'Nokkuvidya Paavakkali'

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
केरल की प्राचीन और दुर्लभ कठपुतली कला 'नोक्कुविद्या पावक्कली' की प्रख्यात कलाकार तथा पद्मश्री से सम्मानित मूझिक्कल पंकजाक्षी का बुधवार को निधन हो गया। पारिवारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।
 
वह 80 वर्ष की थीं। पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि वह उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं और कूथाट्टुकुलम के एक निजी अस्पताल में उनका उपचार किया जा रहा था।
 
कोट्टायम जिले के मोनिपल्ली की रहने वाली पंकजाक्षी को सदियों पुरानी और बेहद अनूठी कठपुतली कला नोक्कुविद्या पावक्कली को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का श्रेय दिया जाता है।
 
पारंपरिक लोककला के संरक्षण और उसके प्रचार-प्रसार में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2020 में पद्मश्री से सम्मानित किया था।
 
पंकजाक्षी ने अपने माता-पिता से यह कला सीखने के बाद मात्र 11 वर्ष की आयु में प्रस्तुति देना शुरू कर दिया था। हालांकि बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण बाद में उन्हें प्रस्तुतियां बंद करनी पड़ी। इस पारिवारिक परंपरा को अब उनकी पोती के. एस. रंजिनी आगे बढ़ा रही हैं।
 
पंकजाक्षी अक्सर इस बात पर चिंता जताती थीं कि यदि नयी पीढ़ी इस कला को सीखने और संरक्षित करने के लिए आगे नहीं आई, तो यह दुर्लभ परंपरा भविष्य में विलुप्त हो सकती है।
 
उन्हें ‘केरल फोकलोर अकादमी पुरस्कार और फेलोशिप’ सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा गया था। नोक्कुविद्या पावक्कली के संरक्षण में उनके योगदान का उल्लेख केरल पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी किया गया है।
 
पंकजाक्षी ने फ्रांस सहित कई देशों में इस पारंपरिक कठपुतली कला का प्रदर्शन किया और केरल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।