KPIT Technologies के सह-संस्थापक रवि पंडित का 75 वर्ष की उम्र में निधन

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 08-05-2026
Ravi Pandit, co-founder of KPIT Technologies, passes away at 75
Ravi Pandit, co-founder of KPIT Technologies, passes away at 75

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
परिवहन प्रौद्योगिकी कंपनी केपीआईटी टेक्नोलॉजीज के सह-संस्थापक एवं चेयरमैन रवि पंडित का शुक्रवार सुबह यहां निधन हो गया। वह 75 वर्ष के थे।
 
कंपनी ने बयान में कहा कि वे अपने संस्थापक और निदेशक मंडल के चेयरमैन के आठ मई को हुए निधन से ‘‘बेहद दुखी’’ हैं।
 
बयान में कहा गया कि स्वर्ण पदक विजेता चार्टर्ड अकाउंटेंट और अमेरिका के एमआईटी के स्लोन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के पूर्व छात्र पंडित, पेशेवर सेवा कंपनी किरतने एंड पंडित चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (केपीसीए) के प्रमुख भी रहे।
 
कंपनी ने कहा कि तीन दशकों से अधिक के करियर में पंडित ने भारत और विदेशों में प्रौद्योगिकी-आधारित परिवहन समाधान और स्थिरता पहलों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
 
व्यवसाय से परे पंडित कई नागरिक, शैक्षणिक एवं नीति संस्थानों से जुड़े रहे।
 
बयान के अनुसार, उन्होंने पुणे इंटरनेशनल सेंटर और जनवाणी जैसे संगठनों की सह-स्थापना की, गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स के सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट का समर्थन किया और सामाजिक संगठन ज्ञान प्रबोधिनी के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।
 
पंडित थर्मैक्स लिमिटेड, वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट इंडिया और आगा खान रूरल सपोर्ट प्रोग्राम इंडिया के निदेशक मंडल के सदस्य भी रहे।
 
कंपनी ने कहा कि उन्होंने भारतीय उद्योग का प्रतिनिधित्व कई मंचों पर किया जिनमें मराठा चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्रीज एंड एग्रीकल्चर के अध्यक्ष के रूप में कार्य करना और सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिसर्च काउंसिल की अध्यक्षता करना शामिल है।
 
बयान के अनुसार, पंडित ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के सशक्त समूह में निजी क्षेत्र के एकमात्र सदस्य के रूप में भी कार्य किया। उन्होंने हाल ही में ‘एचआरआईडीएवाई’ (भारत के कृषि एवं ऊर्जा विकास के लिए हाइड्रोजन क्रांति) पहल पेश की थी जिसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के माध्यम से समावेशी विकास को बढ़ावा देना है।
 
कंपनी ने कहा कि पंडित ने ‘लीपफ्रॉगिंग टू पोल-वॉल्टिंग’ पुस्तक का सह-लेखन भी किया। किताब नवाचार एवं सतत परिवर्तन पर आधारित है।