हज 2026: तपते रेगिस्तान में तकनीक की ठंडी फुहार, हाजियों को मिलेगी राहत

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 08-05-2026
Hajj 2026: A Cooling Shower of Technology in the Scorching Desert—Relief Awaits Pilgrims
Hajj 2026: A Cooling Shower of Technology in the Scorching Desert—Relief Awaits Pilgrims

 

गुलाम कादिर
 
सऊदी अरब में हज का सीजन एक ऐसी परीक्षा की तरह होता है जहां आस्था और सब्र का सीधा मुकाबला कुदरत के प्रचंड मिजाज से होता है। रेगिस्तान की तपती रेत और आसमान से बरसती आग के बीच जब पारा पचास डिग्री के पार पहुँच जाता है, तो इंसान का शरीर जवाब देने लगता है। पिछले कुछ सालों में हमने देखा है कि भीषण गर्मी के कारण कई हाजियों की मौत की दुखद खबरें सामने आईं। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की थी जो ठंडे मुल्कों से आए थे या जिनके लिए रेगिस्तानी गर्मी को बर्दाश्त करना नामुमकिन था। 2025 में भी गर्मी ने अपना भयावह रूप दिखाया था, लेकिन 2026 के हज सीजन के लिए सऊदी सरकार ने सुरक्षा और राहत के इंतजामों को एक नए स्तर पर पहुँचा दिया है।

मक्का शहर और पवित्र स्थलों के लिए रॉयल कमीशन की कार्यकारी शाखा, किदाना डेवलपमेंट कंपनी ने अराफात के मैदान में स्थित 'जबल अल-रहमह' यानी रहमत की पहाड़ी के आसपास कूलिंग प्रोजेक्ट के दूसरे चरण को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
 
यह वह जगह है जहाँ हज का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 'वुकूफ-ए-अराफात' संपन्न होता है। यहाँ लाखों हाजी खुले आसमान के नीचे इबादत के लिए जमा होते हैं। इस बार का प्रोजेक्ट इतना विशाल है कि पिछले साल के मुकाबले पांच गुना ज्यादा हाजी अब ठंडी और छायादार जगहों का लाभ उठा सकेंगे।
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तकनीक और इंजीनियरिंग का बेजोड़ संगम

हज 2026 के लिए तैयार इस दूसरे चरण में आधुनिक तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया गया है। अराफात के मैदान में 18 नए और विशाल कैनोपी यानी आधुनिक छतरियां लगाई गई हैं। इन छतरियों की खासियत यह है कि इनमें 36 मिस्टिंग पंखे लगे हैं जो पानी की बेहद बारीक बूंदों की फुहार छोड़ते हैं।
 
इसके अलावा सात एडवांस एयर-कूलिंग यूनिट्स और 107 मिस्टिंग फैन कॉलम पूरे इलाके में लगाए गए हैं। यह पूरा सिस्टम मिलकर एक ऐसा वातावरण तैयार करता है जिससे चिलचिलाती धूप का असर काफी हद तक कम हो जाता है।
 
अगर हम इस पूरे प्रोजेक्ट के विस्तार पर नजर डालें, तो पहले और दूसरे चरण को मिलाकर अब कुल 2,72,000 वर्ग मीटर से ज्यादा का इलाका इस कूलिंग सिस्टम के दायरे में आ गया है। यह कोई मामूली उपलब्धि नहीं है। रेतीले मैदान में इतने बड़े पैमाने पर तापमान को नियंत्रित करना इंजीनियरिंग की एक बड़ी चुनौती थी। किदाना कंपनी ने इस काम को समय रहते पूरा कर लिया है ताकि अराफात के दिन जब हाजी यहाँ पहुँचें, तो उन्हें हीट स्ट्रोक या लू का सामना न करना पड़े।
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पहले चरण से दूसरे चरण तक का सफर

इस प्रोजेक्ट की नींव साल 2025 में रखी गई थी जब पहले चरण का काम पूरा हुआ था। उस समय तीन बड़ी कैनोपी और 165 मिस्टिंग फैन कॉलम लगाए गए थे। हालांकि वह शुरुआत थी, लेकिन इस साल का विस्तार पिछले साल की तुलना में कहीं अधिक व्यापक है। अब ये दोनों चरण मिलकर एक एकीकृत कूलिंग ग्रिड की तरह काम करेंगे। इसका मतलब यह है कि पूरे जबल अल-रहमह इलाके में ठंडी हवा और पानी की फुहारों का एक ऐसा घेरा होगा जो हाजियों को लगातार राहत पहुँचाता रहेगा।
 
सऊदी सरकार केवल मशीनों पर निर्भर नहीं है। जमीन पर वालंटियर्स और सुरक्षाकर्मियों की टीमें भी तैनात रहेंगी जो हाजियों के बीच छतरियों और ठंडे पानी का वितरण करेंगी। पानी के फौव्वारे केवल सड़क के किनारों पर नहीं बल्कि उन रास्तों पर भी लगाए गए हैं जहाँ से पैदल यात्रियों का गुजरना होता है। सऊदी सरकार का मानना है कि आस्था के इस सफर में किसी भी जान का नुकसान न हो, यह उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
 
गर्मी के खिलाफ एक वैश्विक लड़ाई

हज के दौरान गर्मी से होने वाली मौतें केवल एक देश की चिंता नहीं बल्कि पूरी दुनिया के मुस्लिम समुदाय के लिए एक बड़ा मुद्दा रही हैं। खासकर भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों से आने वाले बुजुर्ग हाजियों के लिए यह गर्मी जानलेवा साबित होती रही है। सऊदी अरब के इन नए इंतजामों से उन परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी जिनके बुजुर्ग इस बार हज पर जा रहे हैं। आधुनिक तकनीक का यह इस्तेमाल दिखाता है कि कैसे पुराने धार्मिक संस्कारों को नए जमाने की सुविधाओं के साथ तालमेल बिठाकर सुरक्षित बनाया जा सकता है।
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मैदान-ए-अराफात में बिताया जाने वाला समय हज का रूहानी केंद्र है। यहाँ हाजी घंटों खड़े होकर अल्लाह से दुआ मांगते हैं। ऐसे में अगर वातावरण में थोड़ी ठंडक हो, तो इंसान पूरी एकाग्रता के साथ इबादत कर पाता है। किदाना डेवलपमेंट कंपनी द्वारा किया गया यह काम न केवल गर्मी के तनाव को कम करेगा, बल्कि हाजियों के अनुभव को भी सुखद बनाएगा।
 
 
आने वाले हफ्तों में जब दुनिया भर के लाखों हाजी सफेद एहराम पहनकर अराफात की वादियों में जमा होंगे, तो तकनीक की ये ठंडी फुहारें उनके लिए किसी बड़ी नेमत से कम नहीं होंगी। सऊदी अरब ने यह साफ कर दिया है कि वह अपनी मेहमाननवाजी और हाजियों की खिदमत में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। अब सबकी नजरें हज 2026 के सफल आयोजन पर टिकी हैं, जहाँ उम्मीद है कि इस आधुनिक कूलिंग सिस्टम की मदद से गर्मी का कहर आस्था के सैलाब के सामने फीका पड़ जाएगा।