आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) ने लंबे समय से विवादों में घिरी रही 'उपनिरीक्षक पुलिस/प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा-2021' को निरस्त करने का फैसला किया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि आयोग यह परीक्षा फिर से करवायेगी।
उन्होंने कहा कि आयोग ने राज्य सरकार की अनुशंसा और अदालत के फैसले के आधार पर यह निर्णय लिया है।
आयोग के अध्यक्ष उत्कल रंजन साहू ने कहा कि 859 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया जारी रहेगी और दोबारा होने वाली परीक्षा में केवल वही उम्मीदवार बैठने के पात्र होंगे जो 2021 की परीक्षा में शामिल हुए थे।
उन्होंने बताया कि ऐसे उम्मीदवारों की संख्या लगभग 3.83 लाख है जो 2021 में 13 से 15 सितंबर तक आयोजित लिखित परीक्षा के दोनों पेपरों में शामिल हुए थे।
साहू ने कहा कि उम्मीदवारों को अपने पहले से जमा किए गए आवेदन पत्रों में सुधार और उन्हें अपडेट करने का अवसर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सुधार के लिए आनलाइन विकल्प 16 मई से 30 मई तक खुला रहेगा।
अध्यक्ष ने कहा कि इस दौरान, उम्मीदवार अपना मोबाइल नंबर, ईमेल पता और पत्राचार का पता जैसी जानकारी अपडेट कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आवेदन पत्र में कोई भी बदलाव करने से पहले उम्मीदवारों के लिए अपने 'वन टाइम रजिस्ट्रेशन' (ओटीआर) में 'केवाईसी' प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि ‘ओटीआर’ से उम्मीदवार की लाइव तस्वीर, हस्ताक्षर और अंगूठे का निशान अपने आप आवेदन पत्र में आ जाएंगे। उन्होंने कहा कि जिन उम्मीदवारों की ‘ओटीआर’ में ‘केवाईसी’ प्रक्रिया अधूरी है उन्हें सुधार करने से पहले इसे पूरा करना होगा।
राजस्थान उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने पिछले साल अगस्त में एसआई भर्ती परीक्षा-2021 को रद्द करने का आदेश दिया था। इस साल अप्रैल में उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने भी इस आदेश को बरकरार रखा।
चयनित प्रशिक्षु उपनिरीक्षकों (एसआई) ने उच्च न्यायालय की खंडपीठ के इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी। हांलाकि, उच्चतम न्यायालय ने हाल में उनकी 'विशेष अनुमति याचिका' (एसएलपी) को खारिज कर दिया।
इस परीक्षा के दौरान 'डमी उम्मीदवारों' का इस्तेमाल करने और अन्य अनुचित साधनों का सहारा लेने के आरोप में राजस्थान पुलिस के विशेष अभियान दल (एसओजी) ने कई प्रशिक्षु एसआई को गिरफ्तार किया था। जिन उम्मीदवारों का चयन इस परीक्षा में नहीं हुआ वे इसे रद्द करने की मांग कर रहे थे लेकिन चयनित परीक्षा रद्द किए जाने के विरोध में थे।
क्या नया वैश्विक आर्थिक मॉडल उभर रहा है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कतर, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देश ईरान को “पेट्रोयुआन” (चीनी युआन में भुगतान) में शुल्क देते हैं, तो यह पेट्रोडॉलर व्यवस्था के धीरे-धीरे कमजोर होने का संकेत होगा।
अर्थशास्त्री एंटोनियो भारद्वाज के अनुसार, यह वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए एक वैकल्पिक ढांचे की ओर बदलाव का संकेत हो सकता है, जिसमें युआन एक प्रमुख मुद्रा बन सकती है।
कुछ विश्लेषकों के अनुसार, इससे वैश्विक तेल बाजार दो हिस्सों में बंट सकता है—एक ओर युआन आधारित व्यापार और दूसरी ओर डॉलर आधारित व्यापार, जिसमें लागत अधिक होगी।