हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने सरकारी स्कूलों के संचालन का लिया संज्ञान

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 08-05-2026
Haryana Human Rights Commission takes cognizance of the functioning of government schools
Haryana Human Rights Commission takes cognizance of the functioning of government schools

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
हरियाणा मानवाधिकार आयोग (एचएचआरसी) ने नूंह जिले के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को पशुशाला और खुले मैदान में संचालित किये जाने संबंधी खबरों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
 
आयोग ने 6 मई को प्रकाशित खबरों का संज्ञान लेते हुए कहा कि इनमें उल्लेख की गई स्थिति अत्यंत गंभीर हैं और प्रथम दृष्टया बच्चों के शिक्षा का अधिकार, स्वास्थ्य का अधिकार और गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार का गंभीर हनन हैं।
 
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा और सदस्य कुलदीप जैन और दीप भाटिया की सदस्यता वाली पूर्ण पीठ के समक्ष रखे गए तथ्यों के अनुसार, नूंह के फिरोजपुर झिरका क्षेत्र में कई सरकारी प्राथमिक विद्यालय उपयुक्त भवनों के बिना संचालित हो रहे हैं।
 
कुबड़ा बास गांव स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय कथित तौर पर एक पशुशाला में संचालित हो रहा है, जहां बालवाटिका से कक्षा 3 तक के लगभग 29 लड़के और 33 लड़कियां पढ़ रहे हैं।
 
स्कूल के बाद, गायों और भैंसों को उसी परिसर में बांधकर रखा जाता है और पशुओं के चारे का भी वहीं भंडारण किया जाता है। परिसर की सफाई के बावजूद, वहां दुर्गंध रहती है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य और सीखने के माहौल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
 
खबरों में यह भी बताया गया है कि स्कूल एक निजी भूस्वामी द्वारा दी गई अस्थायी अनुमति के कारण ही संचालित हो रहा है, जो स्थायी सरकारी भवन नहीं होने को दर्शाता है। बताया जाता है कि यह स्कूल जिले के कम से कम 19 स्कूलों में से एक है जो बिना भवन के संचालित हो रहे हैं।
 
इसी प्रकार, कालू बास गांव का सरकारी प्राथमिक विद्यालय एक खुले मैदान में संचालित हो रहा है, जहां लगभग 45 लड़के और 50 लड़कियां पेड़ों के तने में बांधे गए ब्लैकबोर्ड के माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं।
 
मानसून के दौरान पूरा मैदान कीचड़ से भर जाता है, जबकि सर्दियों में बच्चों को कड़ाके की ठंड में पढ़ाई करनी पड़ती है, जिससे पठन-पाठन बेहद असुरक्षित हो जाता है।
 
आयोग ने पाया कि ऐसी स्थितियां बच्चों की सुरक्षा और गरिमा के साथ गंभीर समझौता करती हैं।
 
आयोग ने कहा कि खबरों से यह भी पता चला है कि हालांकि 2020 में नूंह जिले में 68 नये स्कूलों को मंजूरी दी गई थी, फिर भी कई स्कूलों में बुनियादी ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
 
कई मामलों में, स्कूलों के लिए निर्धारित भूमि गांवों से काफी दूर स्थित है।
 
आयोग ने 7 मई के आदेश में शिक्षकों की भारी कमी पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की।