ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
“मैं PHD होल्डर हूं, NDA में अफसरों को पढ़ाया है और मेरी पेंशन आज 80 हजार होती…” यह दावा करने वाले 80 वर्षीय संतोष गोयल एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका कोई बयान नहीं, बल्कि भारतीय सेना की ओर से उन्हें इलाज के लिए कमांड हॉस्पिटल ले जाना है। आगरा के न्यू आगरा इलाके के नगला पदी में रहने वाले इस बुजुर्ग को मंगलवार को सेना के जवान अपने साथ ले गए। बताया जा रहा है कि सेना उनकी आंखों का इलाज कराएगी, क्योंकि उनकी दोनों आंखें खराब हैं और उन्हें दिखता नहीं है। इस घटना ने एक बार फिर उनके जीवन, दावों और सच्चाई को लेकर बहस छेड़ दी है।
2 अप्रैल का वायरल वीडियो बना चर्चा की वजह
संतोष गोयल पहली बार 2 अप्रैल को चर्चा में आए थे, जब उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। यह वीडियो जीएसटी के एडिशनल कमिश्नर अजय मिश्रा ने रिकॉर्ड किया था। इस वीडियो में संतोष गोयल ने अपने जीवन से जुड़े कई बड़े दावे किए थे। उन्होंने कहा था कि उन्होंने 1971 में अंग्रेजी विषय में पीएचडी की थी और वे पुणे स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) खड़कवासला में शिक्षक के रूप में पढ़ाते थे। उन्होंने यह भी दावा किया था कि उन्होंने आर्मी एजुकेशन कोर में सेवाएं दी हैं और उनके पढ़ाए हुए छात्र आज भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट, कैप्टन, मेजर से लेकर जनरल तक के पदों पर देश की सेवा कर रहे हैं।
“15 साल नौकरी होती तो 80 हजार पेंशन मिलती”
संतोष गोयल ने वीडियो में यह भी कहा था कि यदि उनकी सेवा 15 साल तक पूरी होती, तो आज उन्हें लगभग 80 हजार रुपये मासिक पेंशन मिल रही होती। लेकिन उनकी आंखों की रोशनी जाने के कारण उन्हें नौकरी से बाहर कर दिया गया। उन्होंने बताया कि करीब 3 साल NDA में सेवा देने के बाद उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी, जिसके बाद उनकी नौकरी समाप्त कर दी गई।
भोजन और जीवनशैली का दावा
वीडियो में संतोष गोयल ने अपनी जीवनशैली के बारे में भी बात की थी। उन्होंने कहा था कि उनके दांत नहीं हैं, इसलिए वे रोटी नहीं खा सकते। उन्होंने बताया कि वे पास ही स्थित देवीराम मिष्ठान भंडार से मिलने वाले भोग जैसे ढोकला और लड्डू खाकर अपना पेट भरते हैं। यह बयान भी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा था।

सेना ने लिया संज्ञान, अस्पताल में इलाज शुरू
वायरल वीडियो और बढ़ती चर्चा के बाद अब भारतीय सेना ने इस मामले पर संज्ञान लिया है। मंगलवार को सेना के जवान उनके घर पहुंचे और उन्हें कमांड हॉस्पिटल लेकर गए। सूत्रों के अनुसार, सेना उनकी आंखों की जांच और इलाज कराएगी। इसके साथ ही उनके द्वारा किए गए दावों की भी जांच और पूछताछ की जा रही है, ताकि वास्तविकता सामने आ सके। सेना की इस कार्रवाई के बाद यह मामला और भी अधिक सुर्खियों में आ गया है।
पड़ोसियों को दावों पर भरोसा नहीं
जहां एक ओर संतोष गोयल अपने जीवन को लेकर बड़े-बड़े दावे करते हैं, वहीं स्थानीय लोगों और पड़ोसियों को इन दावों पर भरोसा नहीं है। नगला पदी इलाके के लोग बताते हैं कि वे पिछले कई वर्षों से उन्हें देख रहे हैं, लेकिन कभी भी उन्हें फौजी वर्दी में या किसी नौकरी पर जाते हुए नहीं देखा गया। पड़ोसी रामबाबू ने बताया कि वे लगभग 15 साल से इस इलाके में रह रहे हैं, लेकिन उन्होंने कभी संतोष गोयल को किसी भी सैन्य या शैक्षणिक पद पर काम करते नहीं देखा। उनका कहना है कि वे अक्सर सुबह घर से निकलते हैं और शाम को लौट आते हैं। कई बार उन्हें अंग्रेजी में किसी से बातचीत करते हुए जरूर देखा गया है, जिससे लगता है कि वे शिक्षित हैं, लेकिन किसी नौकरी की पुष्टि नहीं होती।
घर और रिश्तों को लेकर भी अनिश्चितता
संतोष गोयल जिस घर में रहते हैं, वह न्यू आगरा के नगला पदी इलाके में स्थित है। यह घर मुख्य सड़क से लगभग 150 मीटर अंदर एक गली के अंत में है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह घर उनके किसी रिश्तेदार का है, लेकिन घर में रहने वाले लोग उनसे किसी भी तरह के रिश्ते से इनकार करते हैं। परिवार का कहना है कि संतोष गोयल कभी-कभी वहां आते हैं और रात भी गुजारते हैं, लेकिन वे उनके बारे में अधिक जानकारी नहीं रखते। जब मीडिया ने बातचीत की कोशिश की, तो कुछ देर बात करने के बाद घर के लोग अंदर चले गए और गेट बंद कर लिया।
स्थानीय दुकानदारों की अलग राय
इलाके के दुकानदारों की राय भी इस मामले में अलग है। गली के मोड़ पर स्थित दुकान के मालिक सोनी वर्मा ने बताया कि वे लगभग 48 सालों से इस बुजुर्ग को देख रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कभी भी संतोष गोयल को नौकरी करते या फौजी जीवन में नहीं देखा। वे अक्सर गंदे और मैले-कुचैले कपड़ों में ही नजर आते हैं। एक अन्य दुकानदार शेखर ने बताया कि जब से उनका वीडियो वायरल हुआ है, तब से यूट्यूबर्स और मीडिया की भीड़ उनके घर के आसपास बढ़ गई थी। हालांकि, सेना के उन्हें ले जाने के बाद से वहां अब कम लोग आ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा
वीडियो वायरल होने के बाद संतोष गोयल अचानक सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गए थे। कई यूट्यूबर्स और कंटेंट क्रिएटर्स उनके घर पहुंचने लगे और वीडियो बनाने लगे। उनकी कहानी को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोग उनके दावों को सच मानते हैं, तो कुछ इसे पूरी तरह संदिग्ध मानते हैं।
सच्चाई और सवाल दोनों बरकरार
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या संतोष गोयल वास्तव में NDA में शिक्षक रहे हैं या यह केवल उनकी कही हुई कहानी है? स्थानीय लोगों के अनुभव, पड़ोसियों की बात और उनके परिवार की चुप्पी इस कहानी को और उलझा देती है।
वहीं दूसरी ओर उनके पढ़े-लिखे होने और अंग्रेजी में बातचीत करने की क्षमता उनके दावों को पूरी तरह खारिज करना भी मुश्किल बनाती है। संतोष गोयल की कहानी आज एक रहस्य बन चुकी है, जहां एक ओर वे खुद को NDA का पूर्व शिक्षक और पीएचडी होल्डर बताते हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोग और हालात उनकी बातों पर सवाल उठाते हैं।
अब सेना द्वारा उन्हें इलाज के लिए ले जाना इस मामले को एक नया मोड़ दे चुका है। आने वाले समय में उनकी मेडिकल जांच और पूछताछ से शायद इस रहस्य से पर्दा उठ सके। फिलहाल, आगरा का यह “फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाला बाबा” पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है।