आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
बंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि वह चार सप्ताह के भीतर एक विशेषज्ञ समिति गठित करे, जो महाराष्ट्र झुग्गी क्षेत्र (सुधार, सफाई और पुनर्विकास) अधिनियम के क्रियान्वयन की समीक्षा करे।
न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेथना की पीठ ने कहा कि मुंबई और राज्य के अन्य शहरों को ‘‘झुग्गी-मुक्त’’ बनाने के अभी हकीकत से ‘‘दूर नजर आने वाले सपने’’ को पूरा करने के लिए इस कानून को अधिक प्रभावी और सक्षम बनाने की आवश्यकता है।
यह आदेश अदालत ने एक स्वत: संज्ञान याचिका पर दिया। यह याचिका उच्चतम न्यायालय के उस निर्देश के बाद दायर की गयी है, जिसमें कानून के अनुरूप कामकाज और उसके क्रियान्वयन की समीक्षा करने को कहा गया था।
अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि उसे दृढ़ता से महसूस होता है कि कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर अधिकारियों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को बेहद गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
अदालत ने टिप्पणी की कि नगर नियोजन की आदर्श स्थिति पीछे छूटती दिखाई दे रही है, खासकर सरकारी भूखंडों के मामले में।